असम की NRC में बाहर हुए हिन्दुओं के लिए इस एलान के बाद झूम उठे हिन्दू संगठन.. बताया कि- “वापस आ रहा रामराज्य”

असम में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर(NRC) की फाइनल लिस्ट आने के बाद एकतरफ जहाँ विपक्ष बीजेपी पर हमलावर है तो वहीं खुद बीजेपी भी इससे परेशान नजर आ रही है. इसका कारण ये है कि NRC से बाहर लोगों की जो लिस्ट है, उसमें बड़ी संख्या हिन्दुओं तथा असम के जनजातीय समुदाय की भी है. असम बीजेपी के नेता इसके लिए अधिकारियों को दोषी ठहरा रहे हैं. असम में सीनियर बीजेपी नेता हिमंता बिस्वा सरमा ने NRC पर ही सवाल खड़े कर दिए है.

असम NRC के चक्रव्यूह में घिरी बीजेपी ने अब इसके लिए बड़ा प्लान बना लिया है. ये वो प्लान है जो NRC लिस्ट से बाहर हिन्दुओं के लिए खुशखबरी लेकर आया है. खबर के मुताबिक़, बीजेपी NRC के भंवरजाल से निकलने के लिए  नागरिकता संशोधन बिल को हथियार बनाएगी. सरकार की योजना नवंबर में होने वाले संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान हर हाल में इस बिल को पारित कराने की है. ऐसा होने पर एनआरसी में नाम दर्ज कराने में चूक गए हिंदुओं और आदिवासियों को स्वत: ही बिना शर्त देश की नागरिकता मिल जाएगी.

ज्ञात हो कि एनआरसी पर भाजपा और मोदी सरकार पहले फ्रंट फुट पर थी लेकिन जब NRC की लिस्ट सामने आई तो बीजेपी के होश उड़ गये. बीजेपी सूत्रों की मानें तो अधिकारियों ने NRC करने में बड़ी लापरवाही दिखाई है. दरअसल एनआरसी में नाम दर्ज कराने में नाकाम रहे 19 लाख लोगों में बड़ी संख्या में हिंदू भी शामिल हैं. इनमें भी बड़ी संख्या असम के जनजातीय आदिवासियों की है, जिसे असम का मूल निवासी माना जाता है.

पहले पार्टी और सरकार को उम्मीद थी कि राज्य के मुस्लिम बहुल और बांग्लादेश की सीमा से सटे जिलों में बड़ी संख्या में लोग एनआरसी में नाम शामिल नहीं करा पाएंगे. हालांकि जब सूची प्रकाशित हुई तो पता चला कि ऐसे तीन जिलों की तुलना में हिंदूबहुल जिलों में ज्यादा लोग एनआरसी में नाम दर्ज नहीं करा पाए. इसीलिये बीजेपी का कहना है कि कुछ अधिकारियों ने जानबूझकर ऐसी स्थिति पैदा की है. हिमंता बिस्वा सरमा कह रहे हैं कि हम NRC पर फेल हुए हैं तथा इसका दूसरा समाधान निकालेंगे व असम को घुसपैठिया मुक्त बनायेंगे.

हाल ही में गृह मंत्री और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने अपने दो दिवसीय असम दौरे में एनआरसी से बढ़ी मुश्किलों पर राज्य इकाई और राज्य सरकार से गहन विमर्श किया. तय किया गया कि पार्टी के कार्यकर्ता एनआरसी में नाम दर्ज कराने के लिए अपील करने में ऐसे परिवारों की मदद करें, जिनके नाम इसमें शामिल नहीं किए गए हैं. राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाए. इस बीच दो महीने का वक्त निकल जाएगा और संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो जाएगा. फिर इसी सत्र में नागरिकता संशोधन बिल को पारित करा कर ऐसे लोगों को राहत दे दी जाएगी.

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