ईसाईयों और मुस्लिमों को अनुसूचित जाति में शामिल करने का विरोध कर चुके हैं भाजपा राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार. रामनाथ कोविंद. जानिए उनके बारे में और भी बहुत कुछ

बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद को भाजपा के तरफ से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार चुना गया है आपको बता दें कि भारत के राष्ट्रपति प्रवड मुखर्जी का शासन समाप्त होने के बाद भाजपा की ओर से राष्ट्रपति पद पर चुनाव लड़ेंगे कोविंद की उम्मीदवारी का ऐलान होने के बाद विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया राजनीतिक नजरिए से बेहद अहम है। जेडीयू चीफ नीतीश कुमार और बीएसपी सुप्रीमो और दलित नेता मायावती ने बीजेपी के कदम का स्वागत किया बिहार के आपको बता दें कि राज्यपाल के पद से रामनाथ कोविंद ने इस्तीफा दिया दे दिया है, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी को बिहार का अतिरिक्त प्रभार सौंपा दिया गया है. साथ ही राष्ट्रपति ने रामनाथ कोविंद का इस्तीफा मंजूर कर लिया है। राष्ट्रपति चुनाव के लिए रामनाथ कोविंद 23 जून को 11 बजे पर्चा भरेंगे.
गौरतलब है की रामनाथ कोविंद ईसाई और मुस्लिमों को अनुसूचित जाति में शामिल किए जाने का विरोध कर चुके हैं। वह भाजपा दलित मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और अखिल भारतीय कोली समाज अध्यक्ष भी रहे। वर्ष 1986 में दलित वर्ग के कानूनी सहायता ब्युरो के महामंत्री भी रहे। भारतीय जनता पार्टी उनकी उम्मीदवारी की घोषणा करते हुए बीजेपी के नैशनल प्रेसिडेंट अमित शाह ने उनकी दलित पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए कहा था कि वह लगातार दलितों के अधिकार के लिए काम करते रहे हैं। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोविंद की तारीफ करते हुए कहा कि ‘मुझे यकीन है कि कोविंद बेहतरीन राष्ट्रपति साबित होंगे और गरीबों एवं वंचित समुदायों के लिए वह मजबूत आवाज बनेगें।
हालांकि 2010 में बीजेपी के प्रवक्ता के तौर पर रामनाथ कोविंद ने रंगनाथ मिश्रा की उन सिफारिशों का खुलकर विरोध किया था जिसमें ईसाईयों और मुस्लिमों को अनुसूचि जाति में शामिल करने की बात की गई थी।
कोविंद ने कहा था कि इन सिफारिशों की मदद से ईसाई और दलित मुस्लिम पिछड़ी जातियों को मिले आरक्षण की मदद से सुरक्षित सीट से चुनाव लड़ने लगेंगे।इसके साथ ही कोविंद ने आरक्षण का विरोध किया था। उन्होनें ने कहो था कि ‘अगर सरकार रंगनाथ मिश्रा की सिफारिशों को स्वीकार कर लेती है तो धर्मांतरित ईसाई और मुस्लिम अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट से चुनाव लड़ने में सफल हो जाएंगे। कोविंद ने कहा था कि धर्मांतरित ईसाईयों को एससी की सूची में शामिल किए जाने की मांग को ब्रिटिश सराकार ने 1936 में खारिज कर दिया था। 
कौन हैं रामनाथ कोविंद-
रामनाथ कोविंद कानपुर के देहात से आते हैं और दलित वर्ग का नेतृत्व करते हैं. दो बार राज्य सभा सांसद रहे कोविंद पार्टी के अनुसूचित जाति और जनजाति मोर्चे के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी के समय में पार्टी का अपनी सादगी के लिए मशहूर रामनाथ कोविंद ने वकालत की उपाधि लेने के पश्चात दिल्ली हाईकोर्ट में वकालत प्रारम्भ की. वह 1977 से 1979 तक दिल्ली हाईकोर्ट में केंद्र सरकार के वकील रहे. 8 अगस्त 2015 को बिहार के राज्यपाल के पद पर नियुक्ति हुई. वर्ष 1991 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गये. वर्ष 1994 में उत्तर प्रदेश राज्य से राज्य सभा के लिए निर्वाचित हुए. वर्ष 2000 में पुनः उत्तरप्रदेश राज्य से राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए. इस प्रकार कोविंद लगातार 12 वर्षें तक राज्यसभा के सदस्य रहे. वह भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी रह चुके हैं.
. उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात में 1 अक्टूबर 1945 को जन्म। कोविंद को संविधान का अच्छा जानकार माना जाता है।
. पेशे से वकील रामनाथ कोविंद भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रमुख भी रहे। कोविंद ऑल इंडिया कोली समाज के अध्यक्ष भी रहे हैं।
. उत्तर प्रदेश की कानपुर यूनिवर्सिटी से बी. कॉम और एल. एल. बी. की डिग्री हासिल की। कोविंद काफी तेजतर्रार छात्र रहे हैं।
. रामनाथ कोविंद 1971 में बार काउंसिल ऑफ दिल्ली में रजिस्टर्ड हुए। कोविंद ने दिल्ली HC में 1977-1979 तक वकालत की। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में कुल 16 साल तक वकालत का अनुभव।
. दलित तबके से आने वाले कोविंद उत्तर प्रदेश से दो बार राज्यसभा सदस्य रहे हैं।
. रामनाथ कोविंद 1977 में पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के विशेष कार्यकारी अधिकारी रहे चुके हैं।
. रामनाथ कोविंद 1994 में यूपी से पहली बार राज्यसभा सांसद चुने गए। वह 2006 तक सांसद रहे।
. रामनाथ कोविंद गृह मामलों की कमिटी समेत कई संसदीय कमिटियों में शामिल रहे। कोविंद का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से पुराना नाता रहा है।
. रामनाथ कोविंद को बिहार का राज्यपाल भी अचानक ही बनाया गया था। तब सत्तारूढ़ जेडी (यू) ने उनका विरोध किया था।
  मनाथ कोविंद ने समाज के कमजोर तबके के लिए काफी काम किया है।
. उन्होंने अनुसूचित जाति और जनजाति की महिलाओं को मुफ्त कानूनी सलाह दी।
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