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क्या महिलाओं को मिल सकता है इतना अधिकार कि तीन तलाक को कर सके वो इनकार…

सुप्रीम कोर्ट ने
बुधवार को ट्रीपल तलाक केस की सुनवाई पाचंवे दिन भी जारी रही. आज सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट
ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) से पूछा कि क्या महिलाओं को
निकाहनामा के समय तीन तलाक को ना कहने का विकल्प दिया जा सकता है।  कोर्ट ने बुधवार को पूछा कि क्या एक
औरत शादी के समझौते में तीन तलाक को स्वीकार करने से मना कर सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल
लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने इसका जबाव
देते हुए कहा, ‘ क्या ये संभव है कि महिला को निकाह से पहले ये ऑप्शन दिया जाए
कि उसकी शादी तीन तलाक के जरिए खत्म नहीं होगी। क्या काजियों को निकाह के वक्त इस
कंडीशन को शामिल करने के लिए कहा जा सकता है? तीन तलाक से इनकार
करने का विकल्प देता है?’

तब सिब्बल ने बताया कि. मुस्लिम समुदाय
के बहुत कम लोग तीन तलाक की प्रथा का पालन कर रहे हैं और यह प्रथा लगभग खत्म होने
के कगार पर है। उन्होंने कहा, ‘ऐसे में तीन तलाक की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने से हो सकता है कि एक
खत्म होती परंपरा फिर से जिंदा हो जाए और मुस्लिम समुदाय के लोग अपना रूख
सख्त कर सकते है।

कपिल सिब्बल ने आगे कहा है कि केंद्र सरकार तलाक
के लिए नया कानून लाएगी। जब सिब्बल ने कहा कि सरकार सर्वोच्च न्यायालय से नहीं कह
सकती कि आप पहले तलाके के तीनों रूपों को अमान्य करार दीजिए, उसके बाद हम एक नया कानून लाएंगे।

 

 

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