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रामजस कॉलेज में हुई हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस प्रमुख ने चेताया, कहा- ‘इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा

नई दिल्ली : दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज के बाहर बुधवार को एबीवीपी और आईसा कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़प के बाद विरोध प्रदर्शन बढ़ गया है। एक-दूसरे पर आरोप लगाते हुए एबीवीपी और आईसा के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए और एक दूसरे के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। वहीं, एबीवीपी के अध्यक्ष सौरभ शर्मा ने इस घटना को निंदनीय बताया है। 
उन्होंने कहा कि जो भी आरोपी है उस पर कार्रवाई होनी चाहिए, एबीवीपी ऐसी घटनाओं को अंजाम नहीं देती। आपको बता दें कि बुधवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कालेज के बाहर उमर खालिद को लेकर एबीवीपी और आइसा के कार्यकर्ताओं में झड़प और मारपीट हो गई थी। रामजस में एक साहित्य सम्मेलन में जेएनयू छात्र उमर खालिद जिनके खिलाफ पिछले साल देशद्रोह का केस दर्ज हुआ था और जेएनयू छात्र संघ की पूर्व उपाध्यक्ष शैला रशीद को बुलाया गया था। 
लेकिन इस न्यौते के बाद एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर कॉलेज में ‘देशद्रोही गतिविधियां’ होने का आरोप लगाते हुए नारे लगाए। बीजेपी की इस छात्र ईकाई पर आरोप लगाया जा रहा है कि वह जबरन कॉलेज में घुसे, छात्रों के साथ गुंडागर्दी की गई और बिजली बंद करके सभागार को ताला लगा दिया गया। हालांकि, एबीवीपी ने इन सभी आरोपों को नकारा है। 
पुलिस का दावा है कि मौरिस नगर पुलिस थाने के एसएचओ सहित कुछ पुलिसकर्मियों से भी प्रदर्शन के दौरान बदसलूकी की गई, जिसमें सात पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं। इनमें मौरिस नगर पुलिस थाने की इंचार्ज आरती शर्मा भी शामिल हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, उन्हें एबीवीपी और आइसा दोनों ही कार्यकर्ताओं के खिलाफ शिकायतें मिली हैं, जिसे जांच के बाद एफआईआर में जोड़ दिया जाएगा। 
वहीं, रामजस कॉलेज में हुए इस हंगामे के एक दिन बाद कैंपस में एक शिक्षक के ऊपर कुर्सी फेंकी गई और सभी कक्षाओं को सस्पेंड कर दिया गया है। इसके अलावा पुलिस ने मारपीट में शामिल छात्रों के खिलाफ केस भी दर्ज किया है। दिल्ली पुलिस से भी इस बात की जांच करने के लिए कहा गया है कि क्या इस दौरान पुलिसकर्मियों ने जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया। कॉलेज में हिंसा को लेकर पुलिस प्रमुख अमूल्य पटनायक ने कहा ‘यह देश की राजधानी है, इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 
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