जामिया का तालिबानी फरमान, शाजिया को तीन तलाक के मुद्दे पर बोलने से रोका

नई दिल्ली : राष्ट्रद्रोह के नारों को अभिव्यक्ति की आजादी करार देने वाला उमर खालिद कथित धर्म निरपेक्षतावादियों की नजर में प्रगतिशील छात्र है। लेकिन तीन तलाक के मुद्दे पर जामिया जैसे प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में बोलने के लिए जाने वाली शाजिया इल्मी पर जामिया में एंट्री पर ही रोक लगा दी गई, आखिर क्यों। क्या ये अभिव्यक्ति की आजादी पर दोहरा मापदंड नहीं है।

शाजिया इल्मी का आरोप है कि उन्हें जामिया यूनिवर्सिटी में ट्रिपल तलाक पर एक लेक्चर देने जाना था लेकिन यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर की ओर से कहा गया कि शाजिया के वहां आने से माहौल खराब हो जाएगा। कार्यक्रम के आयोजक मुझे बुलाना चाहते थे लेकिन दबाव की वजह से मुझे नहीं बुलाया गया। आखिर शाजिया की एंट्री से माहौल खराब हो सकता है तो डीयू में खालिद को बोलने के लिए क्यों बुलाने का निर्णय लिया गया था।

शाजिया का आरोप है कि उमर खालिद, शहला को देश के टुकड़े करने की आजादी है लेकिन शाजिया इल्मी ने कांग्रेस का भ्रष्टाचार उजागर किया और बीजेपी का साथ दिया इसलिए उन्हें बोलने की आजादी नहीं दी गई। साथ ही शाजिया ने कहा कि एबीवीपी पर हिंसा और मारपीट का आरोप लगाया जा रहा है जो कि पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि मैं जामिया की पूर्व छात्रा हूं और मेरा ट्रेक रिकॉर्ड बहुत अच्छा है। ऐसे में, मेरे जामिया जाने से किसे और क्यों दिक्कत हो रही है।

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