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कश्मीर में जवानों पर झूठा आरोप अब चंडीगढ़ में डॉक्टरों पर भी .. एक कर्तव्यनिष्ठ डॉक्टर की नौकरी खतरे में

अपने क्षेत्र का , अपने पंथ का , अपने मत का ऐसा दुरूपयोग शायद ही इस से पहले कभी या कहीं हुआ रहा हो. पहले निशाने पर सेना थी जो हमारे देश की रक्षा करती है , अब निशाने पर डाक्टर हैं जिन्हे पृथ्वी पर जान बचाने वाला भगवान् कहा जाता है . 

चंडीगढ़ का PGI जो अपने उच्च सेवा और सुविधा के लिए दुनिया भर में जाना जाता है , उसके एक न्यूरो सर्जन पर आरोप लगाया है की डाक्टर ने उसका इलाज़ ये कहते हुए करने से इंकार कर दिया की तुम तो कश्मीरी हो , हमारे जवानो को पत्थर मारने वालों का इलाज हम नहीं कर सकते हैं . श्रीनगर के एक गाँव के रहने वाले जावेद मालिक ने आरोप लगाया है की न्यूरो सर्जरी विभाग में उसकी 55 वर्षीय माँ का इलाज़ डाक्टरों ने ये कहते हुए करने से इंकार कर दिया की सेना पर पत्थर मारने वालों का वो इलाज़ नहीं कर सकते . साथ ही उसने आरोप लगाया की उसकी फ़ाइल को फेंक दिया गया .


जावेद मालिक के इन आरोपों से चंडीगढ़ PGI ने साफ़ इंकार कर दिया , PGI प्रशासन ने साफ़ कहा कि डाक्टर किसी का भी इलाज़ जाति, क्षेत्र या मज़हब देख कर नहीं करते हैं . अस्पताल प्रशासन ने साफ़ किया कि जावेद मालिक के ये आरोप पूरी तरह से निराधार और असत्य हैं . ये बातें प्रोफ़ेसर जगत राम जी ने बोली हैं जो PGI चंडीगढ़ के डायरेक्टर है. नसरीन मालिक के इन आधारहीन आरोपों को कश्मीरियों ने वायरल कर दिया जिसके बाद ये मुद्दा जनता की दृष्टि में आया .


नसरीन मलिक और जावेद मालिक दोनों को ये जानना जरूरी है कि जिस सेना पर तमाम कश्मीरी पत्थर चला रहे हैं उसी सेना ने बाढ़ के समय मानवता का उदाहरण पेश करते हुए एक एक कश्मीरी की जान बचाई थी भले ही वो कोई पत्थरबाज़ ही क्यों ना रहा हो ;. देश के उच्चस्थ स्वास्त्य संस्थान पर ऐसे आरोप लगाने का पीछे उनका कोई भी उद्देश्य क्यों ना हो पर अस्पताल तो उन कुख्यात आतंकियों का भी इलाज़ निस्वार्थ भाव से करता है जो सेना या पुलिस की गोली से घायल हो कर आते हैं . 

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