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क्या है सहारनपुर की अशांति और हाजी इकबाल का आपस में कनेक्शन …. सच चौंका देगा आप को

सहारनपुर जल उठा और
बात दूर तलक गई
दंगे हुए और अब भी तनाव चरम पर है इन दंगों में जानमाल का नुकसान भी हुआ लेकिन इस पूरे षड्यंत्र के पीछे जिसका हाथ रहा
अब भी वो दरिंदा चैन से बैठा है… जी हां हम बात कर रहे हैं इकबाल बाला की..
इकबाल ही वो शख्स है जिसने अपनी काली कमाई के राज के खुलने के डर से एक तीर से दो
निशाना साधने की चाल चली है… यानी योगी और मोदी सरकार एक तरफ बदनाम हो जाए तो
दूसरी तरफ दंगे की सुर्खियों में काले कारनामों के पर्दाफाश की खबरें दब जाएं…


लेकिन सुदर्शन की टीम को उसकी शैतानी साजिश की भनक लग गई और सबसे पहले सुदर्शन ने
सूत्रों के हवाले से बुधवार को इस बात का खुलासा किया कि सहारनपुर दंगे में केंद्र
बने भीम आर्मी को पैसे, संसाधन और हर तरह की मदद करने वाला इकबाल बाला है… वर्ना
साल भर पहले अस्तित्व में आए भीम आर्मी की दंगा कराने और दिल्ली में तीस हजार
लोगों की भीड़ इकट्ठा करने की औकात नहीं थी.. आइए अब हम आपको बताते हैं कि सुदर्शन
टीम की पड़ताल है क्या…..



पिछले महीने की 20
अप्रैल को दलितों के अंबेडकर शोभा यात्रा की अगुआई कर रहे सांसद राघव लखनपाल पर इलाके
के मुसलमानों ने पत्थरों और लाठियों से हमला बोल दिया और इसके खिलाफ जब राघव
लखनपाल ने पुलिस से मदद मांगी तो पुलिस मौके से नदारद हो गई जिससे दलितों का
गुस्सा पुलिस पर फूट पड़ा लेकिन मुसलमानों और दलितों के बीच हुए इस दंगे को आखिर
क्यों भीम आर्मी ने नजरअंदाज किया और उसकी तरफ से कोई बड़ी प्रतिक्रिया क्यों नहीं
आई…
इसी दौरान सुदर्शन की टीम सहारनपुर में इकबाल
बाला के काली कमाई के राज की पड़ताल करने पहुंच गई… करीब हफ्ते भर पड़ताल करने
के बाद इसकी खबर इकबाल के गुर्गों ने उस तक पहुंचाई…


अप्रैल के आखिरी हफ्ते से
सहारनपुर में दलितों को राजपूतों के खिलाफ भड़काने की कवायद तेज हो गई… 17 मई तक
अंदरखाने इस षडयंत्री की तैयारी की गई और इसके पूर्वाभ्यास करने के लिए छिटपुट
घटनाओं को अंजाम दिया गया… 17 मई को सहारनपुर के चारों तरफ करीब सवा दो बजे
दोपहर में 8 जगहों पर एक साथ दंगे हुए और तैयारी इस कदर थी कि पेट्रोल बम से
सरकारी वाहनों दुकानों और पत्रकारों की गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया…
इस पर सवाल उठता है कि दंगाइयों तक पेट्रोल बम
किसने पहुंचाया और कौन दंगों को रिमोट से कंट्रोल कर रहा था..



इसके बाद भीम सेना 21 मई को दिल्ली के
जंतर मंतर पर प्रदर्शन का एलान करती है और नारा देती है कि उत्तर प्रदेश की योगी
सरकार और देश की मोदी सरकार दलितों का दमन कर रही है… हजारों की संख्या में
गाड़ियां और उसमें भरे लोग जानकारी के मुताबिक करीब 30 हजार लोगों को लाया गया था
और करीब 10 हजार लोग जंतर-मंतर पर मौजूद थे.. इस भीड़ के खाने पीने के इंतजाम से
लेकर उनके ठहरने और उनकी रवानगी की व्यवस्था बेहद संगठित तरीके से की गई थी.. बताया
जा रहा है कि सभी को एडवांस पेमेंट किया गया था..


अब सवाल उठता है कि भीम सेना का
संस्थापक चंद्रशेखर की क्या करोड़ों खर्च करने की औकात है क्योंकि इस रैली और
आंदोलन में करीब 8 से 10 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं.. सूत्रों के मुताबिक इकबाल बाला
के गुर्गे और मुंशी भीम सेना के कई कद्दावर सदस्य हैं… खबर इस बात की भी है कि
बसपा सुप्रीमो मायावती के भाई और हाल ही बनाए गए बसपा के उपाध्यक्ष आनंद चंद्रशेखर
से लगातार फोन से संपर्क में थे… यानी इकबाल बाला ने इसे हिंदू बनाम मुसलमान के
दंगे की जगह दलित बनाम सवर्ण दंगा करने की साजिश की जानकारी अपने आका बसपा
सुप्रीमो और उनके भाई को ये कहकर दी कि…..



दंगे से दलित बीजेपी से नाराज हो
जाएंगे और दलितों को बीजेपी से जोड़ने के अभियान को बट्टा लग जाएगा… लेकिन इकबाल
इस दंगे के असली मकसद को दबा गया जो उसके काली दुनिया के राज के पर्दाफाश को रोकने
के लिए थी। और सुदर्शन के इस खुलासे की पुष्टि सहारपुर के बेहट से विधायक नरेश
सैनी ने की।

 

 

लखनऊ में सीएम योगी से
मिलने पहुंचे सहारनपुर क्रशर संगठन के लोगों ने भी सुदर्शन की खबर पर मुहर लगाई।

 

 ऐसे में सुदर्शन न्यूज कई सवाल
खड़े कर रहा है

 

सवाल १ –  भीम आर्मी 20 अप्रैल को कहां
थी, जब मुसलमानों ने अंबेडकर शोभा यात्रा पर हमला बोला था
?

 

सवाल २ – मुसलमान बनाम दलित के दंगे को
भीम आर्मी ने क्यों की अनदेखी
?

 

सवाल ३ – 17 मई को 8 जगहों पर एक साथ एक समय
में दंगा और पेट्रोल बम किसने पहुंचाया और कौन कर रहा था रिमोट कंट्रोल

 

सवाल 4 – दिल्ली में रैली के लिए किसने की
रुपये और साजो सामान से मदद
?

 

सवाल 5 – बसपा सुप्रीमो के भाई आनंद क्यों
था लगातार चंद्रशेखर के सम्पर्क में
?

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