जनता मांग रही है “सज़ा-ए-मौत” उस दुर्दांत अपराधी के लिए जिसका न्याय होना है 29 मई को

शायद ही किसी को 1993 का मुंबई नरंसहार याद न हो जब एक वर्ग विशेष ने अपने रक्तरंजित मंसूबों को पूरा करने के लिए तमाम निर्दोषों को अपने आतंक की करतूतों का शिकार बना डाला था ख़ास कर उन लोगों को जिनका कोई भी दोष नहीं था .

257 निर्दोषों की जान लेने और 713 लोगों को घायल कर देने वाले दुर्दांत अपराधी “अबू सलेम” का फैसला 29 मई को मुंबई की टाडा कोर्ट करेगी . इस मामले में कुल १२३ अपराधी हैं जिन में से १२ को निचली अदालत सज़ा ए मौत मिल चुकी है . इसी केस में 68 अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सज़ा मिल चुकी है बाकी २३ को संदेह का लाभ मिलते हुए बरी कर दिया गया था . इस अपराधियों के कारण भारत को 27 करोड़ के आर्थिक नुक्सान उठाना पड़ा था . 


इस कुल मामले का मुख्य अभियुक्त दाऊद इब्राहिम फरार चल रहा है और वर्तमान में पाकिस्तान में छुपा हुआ है . टाइगर मेमन भी इसी केस में वांछित है जिसे पाकिस्तान ने शरण दे रखी है जिनके खिलाफ पहले से ही रेड कार्नर नोटिस जारी किया है . इस 29 मई को सम्पूर्ण भारत की निगाह उस दुर्दांत अबू सालेम के निर्णय पर होगी जिसने केवल रक्त पिपासु सोच के चलते पल भर में 257 लोगों की जिंदगियां लील ली . 


पीड़ित परिवारों में ही नहीं बल्कि पूरे भारत को दुर्दांत अपराधी अबू सलेम के मृत्यु दंड की प्रतीक्षा है जिसने कभी मुंबई को आतंकित करने के लिए , अपनी जहरीली सोच के चलते मुंबई को लहूलुहान कर डाला था . 

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