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गौ रक्षको को आगे कर के पीछे बन रहा था कत्ल का प्लान. अमरनाथ हमला पूरी सोची समझी साजिश

जब एक ही खबर को बिना सबूत के बिना तथ्य के रबड़ की तरह खींचा जा रहा हो , जब एक ही लक्ष्य बना कर बार बार वार किया जा रहा हो , जब प्रधानमंत्री से ले कर सड़क पर पंचर बना रहे किसी की जुबान पर एक ही नाम हो , और उसके खिलाफ ना ही कोई प्रमाण और ना ही कोई मजबूत तथ्य हों तो तब ऐसे मुद्दों पर जांच करने के बजाय उनका अंध समर्थन करना कुछ ना कुछ अनिष्ट का कारण बनता है ..ठीक ऐसा ही हुआ है इस बार अमरनाथ यात्रा में जब एक वर्ग विशेष ने पूरी सोची समझी साजिश के तहत भारत के पूरे सरकारी तंत्र को जिसमे प्रधानमंत्री तक शामिल हों , को केवल एक ही विषय पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया था .. 

अमरनाथ यात्रा की शुरुआत से महीनो पहले अक्सर सुरक्षा एजेंसियों के साथ गृह मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय तक को हाई लेवल मीटिंग कर के आतंकियों के मंसूबे , ख़ुफ़िया एजेंसियों के इनपुट आदि पर चर्चा करते हुए और उन पर सुरक्षा बलों के उच्चाधिकारियों के साथ गहन विचार करते हुए पाया जाता था पर इस बार जो हुआ वो अपने आप में अलग प्रकार का माहौल था ..अमरतनाथ यात्रा से पहले एक वर्ग लगातार झूठ और नकली बातों का सहारा ले कर जनता से ले कर सुरक्षा तंत्र यहाँ तक की प्रधानमंत्री तक का ध्यान भटकाने में कामयाब रहा था जिसके पीछे लिखी जा रही थी मौत की इबादत .. 

इस हल्ले को राष्ट्रीय स्वरूप दिया गया जिस से किसी को शक ना हो और साजिश बिलकुल असली लगे .. इस साजिश की शुरुआत सबसे पहले झारखंड से हुयी जहाँ अपनी संदिग्ध हरकतों के चलते भीड़ ने  बच्चा चोर समझ कर तीन लोगों को मार डाला था . उसकी पूरी ब्रांडिंग गौ रक्षको से जोड़ कर दी गयी और सिर्फ अफवाह उड़ाने वाले तमाम पोर्टलों ने कुछ सहयोगियों के साथ इस मुद्दे पर बवाल का आधार बना डाला.. इसके बाद अगला नंबर लगाया गया बिजनौर की ट्रेन में तैनात एक कर्तव्यपरायण पुलिस जवान कमल शुक्ल को . एक मुस्लिम लड़की के झूठे बयान को आधार बना कर अचानक ही मामले को तूल दिया गया जिसमे गद्दार ओवैसी की पार्टी तक कूद गयी और उस कर्तव्यपरायण जवान के क़त्ल के फतवे तक जारी कर दिए गए . बाद में वो जवान निर्दोष साबित हुआ पर उतना समय काफी था सबका ध्यान बंटाने के लिए ..

फिर पहलू खान को मुद्दा बनाया गया जिसका आरोप गौ रक्षको पर लगाया गया इसकी भी ब्रांडिंग बेहद शानदार तरीके से कर के सारी सरकारी मशीनरी का ध्यान केवल गौ रक्षको पर खींच लिया गया . इसके बाद सोनिया विहार में हिन्दू की ही जमीन को मस्जिद बता कर एक बेहद ही संगीन झूठ बोल कर अमरनाथ यात्रियों या उनके कत्ल की साजिश बनाने वालों की तरह सोचने का मौका भी नहीं दिया गया . . अभी मुद्दा थमा ही नहीं था फिर अलीमुद्दीन को सामने लाया गया और सारे मामले में एक बार फिर निशाने पर गौ रक्षक कर दिए गए और इस बार भारत के प्रधानमंत्री भी बोल पड़े और उन्होंने अपना सारा दुःख गौ रक्षको के कार्यों पर जता दिया . 

ब्रांडिंग कुछ ऐसी थी की अक्सर हिंदुत्व की ही बात करने वाली शिवसेना भी उनके जाल में फंस गयी और गौ रक्षको के खिलाफ खड़ी हो गयी . पूरे भारत में माहौल बना दिया गया की भारत की हर गलती का जिम्मेदार केवल हिन्दू और गौ रक्षक ही हैं बाकी कहीं न कोई आतंकवाद है , कहनी ना कोई मज़हबी कट्टरता है , कहीं ना कोई आज़ादी के नारे हैं आदि आदि . इस बेहद सफल ब्रांडिंग को अंजाम देने के लिए ना सिर्फ नकली न्यूज पोर्टल बल्कि खुद को राष्ट्रीय चैनल कहने वाले तमाम बड़े मीडिया हाऊस भी थे .. उनका साथ देने के लिए एक और ब्रिगेड उतारी गयी जिसे अवार्ड वापसी ब्रिगेड कहते हैं और उन्होंने इस झूठ को रंग पोत कर सच साबित करने में महत्वपूर्ण रोल अदा किया . 

इस पूरे घटनाक्रम को इतना हल्ला मचा कर किया गया की किसी भी उच्चपदस्थ को ये भी नहीं पता चला की अमरनाथ यात्रा में हिन्दुओं को निशाना बनाय जा सकता है या उनकी जान को भी खतरा हो सकता है . हर तरफ वो साजिश ये शोर मचाने में कामयाब हो गयी की भारत में मुसलमानो को खतरा उग्र हिन्दुओं से है ना की आस्थावान हिन्दुओं को खतरा आतंकी मुसलमानो से .. इस पूरी साजिश को रचने वाली टीम ने बाद में आतंकियों को हरी झंडी दी होगी और उन्होंने अपने कार्य को रक्तरंजीत तरीके से अंजाम दिया . एक बार फिर भारत के हर शिवभक्त के मन में दहशत फ़ैल गयी और अमरनाथ में सेना के साये में जीने को मजबूर कर दिया .. 

अमरनाथ को ऐसी यात्रा बना दी गयी जहाँ कोई श्रद्धालु कोई कदम किस दिशा में , किस समय , कितना बड़ा रखेगा ये सेना तय करेगी .. अब कहाँ रुकना है , कब रुकना है , क्यों नहीं रुकना ये सब सेना से पूछ कर करना होगा .. कहाँ नारा लगाना , कहाँ जय बोलनी है और कहाँ चुप रहना है ये भी सत्ता निर्धारित करेगी .. गौ सेवा भी हमारी श्रद्धा है और महादेव भी हमारी आस्था .. गौ सेवा पर रोक लगाने के लिए उन्होंने सरकार को आगे किया है और महादेव की भक्ति छीनने के लिए उनका हथियार आतंकी है … यदि शासन और सत्ता इस साजिश को समझ पाती तो आज कम से कम दहशत का ये राज न होता ….

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