कौन था वो “बाबर” जिसके नाम पर आज भी सेंकी जा रही हैं राजनीति की रोटियां ?

लाखों-करोड़ों सालों से भारत दुनिया के नक्शे पर कायम है, निश्चित ही भारत से ही सभय्ता और मानवता का उद्गम माना जा सकता है . फिर भी भारत ने मानवता के मूल्यों के साथ अपने खुद के  अस्तिव को बनाए रखने के लिए कितने पढ़ावों को पार किया है। ब्रिटिश शासनकाल अगर भारत के दिल को चीरता हुआ घाव दें गया तो मुगल शासनकाल भारत के इतिहास पर ऐसे दाग लगा गया जिन निशानों को आज भी भारत में रहने वाला व्यक्ति धोने का प्रत्यन कर रहा है। उन्ही तमाम घावों और दाग धब्बों में से एक है भारत को लूटने और गुलाम बनाने के मकसद से भारत में आया लुटेरा बाबर ..
मुगल शासनकाल को भारत में बाबर ले ही  कर आया था जब भारत के सहिष्णु समाज ने उसकी क्रूरता के आगे अपने युद्ध के नियमों और मानवता के मूल्यों को रखा और अंत में वो परास्त हुए .  भारत पर अपनी क्रूरता का झंड़ा फहराने के बाद बाबर भारत को कुछ ऐसे दर्द दे गया जिनसे हम आज भी लड़ रहे है। उनमें से एक है अयोध्या में राम मंदिर का मुद्दा, आतंकी बाबर ने प्रभु श्री राम के मंदिर को धवस्त कर वहां पर मस्जिद बनवा दिया। जिस विवाद को चलते 490 साल हो गये और श्री राम मंदिर का पुनः निर्माण नहीं हो सका । आतंक का सरगना ये बाबर कौन था , आज हम आपको बताते है। 
बाबर का पुरा नाम जहीरुद्दीन मोहम्मद बाबर था। बाबर का जन्म 24 जनवरी 1483 ईस्वी में फरगना में तैमूर के वंश में हुआ था। बाबर तैमूर का चगताइ तुर्क था। बाबर के पिता का नाम उमर शेख मिर्जा व माता का नाम कुतलुक निगार खान था। बाबर के पिता फरगना राज्य के शासक थे। सन 1494 ईस्वी बाबर के पिता की मृत्यु हो गई जब बाबर मात्र 12 साल का था। पिता की मृत्यु के बाद बाबर फरगना की राजगद्दी पर बैठ गया। फरगना की सत्ता को समालने के बाद बाबर को अध्यन का अवसर नहीं मिला, पर उसने तुर्की और फारसी भाषाओं का ज्ञान प्राप्त कर लिया था। 
बाबर से पहले कई मुगल राजा भारत आए और भारत को लूट , मार काट मचा कर चले गये,  बाबर भी भारत को लूटने आया था पर यहाँ का वैभव देख कर उसने भारत पर शासन करने का मन बना लिया . बाबर ने भारत पर पहले भी कई आक्रमण किये जिनमें वो सफल नहीं हो पाया पर 1526 में पानीपत की लड़ाई में दिल्ली के लोधी सुल्तान को शिकस्त कर दिया और दिल्ली की गद्दी पर बैठ गया। दिल्ली की गद्दी पर विराजमान होने के बाद बाबर ने आस पास के प्रदेशों को अपने अधीन करना शुरू किया और अपने साम्राज्य का हिस्सा बना लिया, और भारत में मुगल साम्राज्य की स्थापना की।
बाबर ने पानीपत के अलावा और भी युद्ध लड़े जिसमें खनवा की लड़ाई भी थी, बाबर ने पानीपत का युद्ध राणा संग्राम से लड़ा था। वास्तव में बाबर को भारत आने का न्योता राना संग्राम ने ही दिया था। राना संग्राम सोच रहे थे कि बाबर भारत से चला जाएगा मगर बाबर नहीं गया। अपने आप को मजबूत करने के लिए बाबर ने मेवाड़ पर आक्रमण कर दिया, और राना संग्राम को चुनोती दे दी। 17 मार्च 1527 को बाबर ने राना संग्राम को खानवा में पराजित कर दिया। राना संग्राम को जब लगा कि वो हरने वाला है तब राना संग्राम ने आत्महत्या कर ली, और बाबर की सेना ने राजपूत सेना को हरा कर भीषण रक्तपात किया .
खानवा युद्ध के बाद बाबर ने घागरा का युद्ध लड़ना पड़ा। क्योंकि राजपूतों को हराने के बाद बाबर को अफगानी शासको का विरोध का सामना करना पड़ा। जो बिहार व बंगाल के शासन कर रहे थे। मई 1529 में बाबर ने घागरा में समस्त अफगानीओं के साथ युद्ध लड़ा, और जीत गया। अब तक बाबर एक मजबूत शासक बन गया था। बाबर ने पूरे देश में अपना शासन बड़ी तेजी से फैलाया। बाबर देश के कोने कोने में गया। बताया जाता है की अन्य मतो के प्रति बेहद घृणित सोच के चलते 1528 के पास बाबर के सेनापति मीरबाक़ी  ने अयोध्या में श्री राम मंदिर को धवस्त करा कर वहां एक मस्जित का निर्माण करा दिया।
गैर मत वालो का खून बहाना , गैर मजहबी औरतों से बलात्कार करना , निर्दोषों की जान लेना , औरतों , बच्चो और बूढ़ों पर बिना आयु या लिंग देखे क्रूरता करना, दूसरों के ख़ज़ाने लूटना आदि कार्य बाबर और उसकी सेना के मुख शौक माने जाते थे . बाबर का उद्देश्य भारत में इस्लामिक शासन लागू करना था. बाबर चरित्रिक दोष से पूर्ण था जिसने दुश्मनो की लूटी गयी असहाय औरतों को रखने के लिए हरम भी बनवाये थे . माना जाता है की बाबर का अपने ही दरबार के किसी लड़के के प्रति झुकाव भी था जिसके लिए वो अक्सर शायरियां आदि गुनगुनाता रहता था .
भारत में काफी हद तक अपना शासन को फैलाने के बाद बाबर सत्ता का सुख नहीं ले पाया और 1530 में बिमारी के चलते उसकी मौत हो गई। बाबर की मौत के बाद बाबर का बेटा हुमायूँ उसकी गद्दी पर बैठा और मुगल शासन को आगे बढ़ाया। ऐसे क्रूर बाबर का पक्ष ले कर आज भारत की राजनीति होना ही राजनैतिक मूल्यों के पतन का प्रमुख कारण है . दुर्भाग्य एक विषय ये है की ऐसा बाबर आज भी हमारी राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बना हुआ है .
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