किसी ने बाइक रोक कर तो किसी ने दुकान से निकल कर कहा- अलविदा कैप्टन, हो सके तो फिर आना ।।

शायद ही उद्द्योग नगरी पहले किसी और के लिए इतनी भावविह्वल हुई रही हो,

शायद ही नगर का हर तबका इस तरह रोया रहा हो ..

ये समय तब का है जब कश्मीर में विधर्मियों से भारत भूमि की रक्षा करते हुए सदा के लिए अमर हो गए कानपुर निवासी कैप्टन आयुष का शव चकेरी एयरफोर्स स्टेशन से उनके घर की तरफ जा रहा था .. सेना की ट्रक के पीछे जिसके पास कार थी वो कार ले कर , जिसके पास  बाइक थी वो बाइक ले कर और जो पैदल था वो पैदल ही भारत माता की जय और वन्देमातरम के नारे लगाता हुआ निकल पड़ा ।।

घर का माहौल बेहद चीत्कार भरा था, आखिर जवान बेटा खोया था उन्होंने ,, आयुष के पिता खुद पुलिस अधिकारी हैं जो सख्त मिजाज के हैं पर बेटे के शव को देख कर स्वयं को रोक नही पाए ।।  312 मीडियम रेजिमेंट में तैनात अफसर आयुष को अभी 3 वर्ष पहले ही सेना में कमीशन मिला था और वो तरक्की पा कर कैप्टन बने थे ।।

कानपुर शहर उनके अंतिम यात्रा में आंसुओं से भीगा दिखा, सेना ने उन्हें अपनी विभागीय सलामी दी ।। हर किसी की जुबान पर था कि – हो सके तो लौट आना ।।

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