भाजपा का सदस्य बना था मुहम्मद हुसैन , इसीलिए उसे मार डाला .. सवाल ये है कि – “भारत में कितने बरकाती?”


कट्टरता की उस हद की कल्पना कीजिये जहाँ किसी की हत्या का आधार ना जमीन हो , ना जायदाद हो , ना कोई प्रेम प्रसंग हो और ना ही कोई पुरानी दुश्मनी हो .. जबकि कत्ल का आधार केवल इतना हो की उसने भारत की सत्ता में बैठी पार्टी में अपने और अपने समाज के लिए कुछ करने की मंशा से भर्ती होना स्वीकार कर लिया ..और आखिर में यही बन गया उसकी मौत की वजह जबकि उसने कभी भी किसी का कुछ भी नहीं बिगाड़ा था .. मारने का तरीका भी बेहद नृशंस , मतलब तब तक पीटा गया जब तक उसके प्राण पखेरू ना उड़ जाएँ , ठीक वही हालत जो पाकिस्तान या इराक में दीखते हैं .

मामला बंगलुरु का है , यहाँ एक अलग सोच और कट्टरता से दूर एक युवा मुहम्मद हुसैन ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की और आम जनमानस में उसका प्रचार शुरू कर दिया . ना जाने क्यों उसके बाद उसे प्राणघातक धमकियां मिलनी शुरू हो गयी . वो देश से प्रेम करता था साथ ही उसे शायद एहसास था की वो कुछ गलत नहीं कर रहा था , इसीलिए उसने किसी भी धमकी आदि से डरने के बजाय अपना कार्य जारी रखा . 

आखिर में धमकी देने वालों ने उसे मौत के घात उतारने का फैसला किया और पहले से ही घात लगाए कुछ आताताइयों ने 4 मई को धोखे से उस पर घात लगा कर हमला बोल दिया . अचानक हुए इस हमले में मुहम्मद हुसैन बुरी तरह से ज़ख़्मी हो गया .. उसे तत्काल अस्पताल में भर्ती करवाया गया , जिंदगी और मौत से जूझने के बाद अंत में वो आतताइयों के दिए गए घावों से हार गया और लगभग १ हफ्ते बाद अस्पताल में दम तोड़ दिया . 

मुहम्मद हुसैन के परिजनों ने बताया की भाजपा में भर्ती होना ही उसकी मौत का कारण बना है. पुलिस ने इस मामले में 4 आताताइयों को गिरफ्तार किया है . मुहम्मद हुसैन भले ही दुनिया छोड़ कर चला गया पर लोगों के लिए एक सवाल छोड़ कर चला गया है . वो सवाल है कि – ” कौन है असहिष्णु ” और क्या उसके साथ हुई घटना को वो तमाम लोग “असहिष्णुता” नहीं मानते जिन्होंने एक इकलाख को भारत का सबसे बड़ा मुद्दा बना दिया था . 


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