सेना के घेरे से बचा ले गए गांव वाले हिजबुल आतंकी आदिल को ..पर हमे तो बताया जाता है कि – “सब एक जैसे नहीं होते”

भारत मे जब भी किसी समुदाय को निशाना बना कर किसी दूसरे समुदाय के लोग हमला , कत्ल यहां तक कि बलात्कार भी कर देते हैं तो अक्सर बड़े बुजुर्गों और कुछ तथाकथित बुद्धिजीवियों के मुंह से बार बार एक शब्द निकलता है – सब एक जैसे नहीं होते ..और पीड़ित इन शब्दों के सहारे अपनी उजड़ी जिंदगी फिर से बसाने की कोशिश कर देता है ..

पोस्टर बॉय सब्ज़ार अहमद को मार गिराने वाली सेना की जांबाज़ टुकड़ी के हाथों एक और विधर्मी आतंकी मारा गया होता अगर उस दिन गांव से निकल कर कुछ पत्थरबाज और आम लोग उस घटना स्थल पर पहुच कर एक कुख्यात आतंकी आदिल को चुपके से अपने मे मिला कर ना ले कर चले गए होते तो ..

सैन्य सूत्रों का कहना है कि 3 आतंकियों को मार गिराने के बाद चौथा आतंकी गांव वालों की मदद से फरार होने में सफल रहा ..प्राप्त जानकारी के अनुसार आतंकी आदिल को भीड़ ने पहले घर घर कर अपने साथ मिलाया फिर उसी भीड़ का हिस्सा बना कर वो आदिल को अपने साथ ले गए ..सैन्य सूत्रों से बताया गया कि सेना को सब्ज़ार इनकाउंटर में भारी पत्थरबाज़ी का सामना करना पड़ा था जिसके एक आतंकी गांववालों की भीड़ में उन्ही के सहयोग से भाग निकला ..

 इस घटना के बाद सवाल उठता है कि यदि सब लोग ये कहते हैं कि सारे बुरे नहीं होते .. तो अब वो ही बताएं कि उस बड़े गांव की सैकड़ों की भीड़ में एक भी अच्छा व्यक्ति क्यों नहीं निकला जो इन आतंकियों के खिलाफ धर्मयुद्ध में सेना के विरोध में नहीं बल्कि सेना के साथ कंधे से कंधा मिला कर आतंकवाद  के खिलाफ छेड़ी गयी जंग को खुद की मर्जी से लड़ता  …

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