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घर गली और मौहल्ले के झगड़े भी जोड़े जा रहे हैं गौरक्षा से. सावधान रहे भारत….


भीड़ का आये दिन कानून अपने हाथ में लेना चिंता का विषय है। पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने बीते दिनों इस विषय पर गहरी चिंता जताई थी। भीड़ का बेकाबू हो जाना, कानून को अपनी हाथ में ले लेना चिंता का विषय है। भाजपा के वरिष्ठ लोग भी बेकाबू भीड़ को लेकर चिंतित है। भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा भीड़ के दवारा की जा रही हत्याओं को सांप्रदायिक रंग देने को लेकर चिंतित हैं। 
यशवंत सिन्हा ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि भीड़ द्वारा की जा रही हत्याओं से जो माहौल बना है, वह भारत के भविष्य के लिए हानिकारक है। इससे विदेशी देशों को भारत के प्रति नकारात्मक संदेस पहुंच रहा है। सबसे जरुरी बात यह है कि इस तरह के माहौल में विदेशी निवेशक अपना हाथ पीछे खींचने लग जाते हैं। उन्होंने जोर देते हुए यह भी कहा कि हमेशा इस तरह की घटनाओं को गोमांस या गाय से जोड़कर सांप्रदायिक रंग देना उचित नहीं है। उन्होंने पीएम मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि गाय व गोमांस पर उन्होंने काफी सख्त संदेश दिया है। 
राज्य सरकारों को अपना खुफिया तंत्र विकसित करने की भी हिदायत दी, जिससे इस तरह की घटनाओं की पड़ताल की जा सके और इस भीड़ की हिंसा से बचा जा सके। सिन्हा का कहना है कि 2012 में वह जर्मनी में एक कार्यक्रम में भारतीय अर्थव्यवस्था पर व्याख्यान दे रहे थे, तब उनसे सवाल पूछा गया था कि दिल्ली में हुए सामूहिक दुष्कर्म पर उनकी क्या राय है। उनका कहना है कि लोग मानते हैं कि अगर भीड़ के हाथ में न्याय व्यवस्था है तो फिर सरकार क्या मूक दर्शक बनी हुई देख रही है। उनका कहना है कि इस तरह की वारदातों से सबसे बड़ा झटका अर्थव्यवस्था को पड़ता है।

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