कहां गई अभिव्यक्ति की आजादी की दुहाई… ऐसा क्यों किया कांग्रेस सरकार ने उस महिला अफसर के साथ उसकी फेसबुक देखने के बाद ?

भारत तेरे टुकड़े होंगे तथा कश्मीर की आजादी जैसे देशविरोधी नारों को अभिव्यक्ति की आजादी बताने वाले कथित बुद्धिजीवी तथा लिब्रल्स गैंग इस घटना पर चुप्पी साध चुकी है. इस गैंग के लिए देश के खिलाफ नारेबाजी करना, देश के टुकड़े करने की बात करना, कश्मीर की आजादी की बात करना, हिन्दू आस्थाओं पर लगातार बेहद की आपत्तिजनक टिप्पणी करना तो अभिव्यक्ति की आजादी माना जाता है लेकिन जब कोई महिला अफसर कांग्रेस पार्टी को लेकर अपने विचार सोशल साइट्स पर रखती है तो उसको कांग्रेस सरकार द्वारा बर्खास्त कर दिया जाता है तथा अभिव्यक्ति की आजादी के ठेकेदार इस पर चुप्पी साध लेते हैं.

मामला कांग्रेस शासित छतीसगढ़ का है जहाँ के बेमेतरा जिला प्रशासन ने एक महिला अफसर डॉ. नीलिमा गडकरी को इसलिए सस्पेंड कर दिया है क्योंकि उसने सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर कांग्रेस को लेकर एक टिप्पणी की थी. महिला अधिकारी ने कांग्रेस और कंग्रेस नेताओं को लेकर फेसबुक पर पोस्ट किए थे, जिसे हाल ही में वायरल कर दिया गया. हालांकि पोस्ट करीब एक साल पुराने हैं तथा अब वायरल हुए हैं. ये पोस्ट वायरल होने के बाद महिला अधिकारी को सस्पेंड कर दिया गया.

महिला अधिकारी के खिलाफ की गई शिकायत में कहा गया कि प्रशासनिक पद पर रहते हुये राज्य सरकार एवं उनके मंत्रियों के खिलाफ और कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी, राजीव गांधी, राहुल गांधी पर भी अपने फेसबुक अकाउंट से किये गये राजनीतिक पोस्ट किए गए हैं, जो राज्य सेवा नियमों का उल्लंघन है. इस शिकायत को आधार कर ही कार्रवाई की गई है.

बताया जा रहा है कि नी​लिमा गडकरी के नाम से बने फेसबुक एकाउंट पर किए गए उन पोस्ट पर आपत्ति जताई गई है, जिसमें लिखा है- ‘राजीव ​जी महान हो सकते थे, राहुल महान नहीं हो सकते, अटल जी हार सकते थे, नमो नहीं हारेंगे. क्योंकि सोशल मीडिया है न.’ इसके अलावा कर्नाटक विधानसभा परिणाम के बाद सरकार बनाने को लेकर बनी स्थिति और पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह पर भी पोस्ट किए गए हैं, जिसको लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई है. इसके बाद प्रशासन की ओर से जांच के बाद कार्रवाई की गई है.


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