भारत विरोधी नारों के लिए बदनाम कन्हैया कुमार के प्रशंसक हैं “भगवा आतंकवाद’ कहने वाले “दिग्विजय सिंह”. “लाल सलाम” में हाथ “कांग्रेस’ का तो नहीं ?

जब JNU में भारत विरोधी नारे लगे थे तब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी वहां गये थे और उन्होंने एक नया शब्द इजाद किया था और वो था “अभिव्यक्ति की आज़ादी’ .. बाद में इसी शब्द ने इतना व्यापक रूप ले लिया था कि उसकी आड़ में पहले तो देश विरोधी नारे लगने शुरू हो गये और बाद में एक नया समूह अस्तित्व में आया जिसका नाम “टुकड़े टुकड़े” गैंग दिया गया .. इन्होने बाद में राष्ट्र विरोधियो का इतना मनोबल बढ़ा दिया कि भारत के सेना प्रमुख को कथित अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर गुंडा बोला जाने लगा .

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विदित हो कि भले ही उपरी स्तर पर कांग्रेस अलग चुनाव लड़ रही हो लेकिन अब दिग्विजय सिंह के एक बयान से एक साथ कई बातें साफ हो गयी हैं . भारत विरोधी नारों के लिए बदनाम और बेगूसराय से हिंदुत्व के फायरब्रांड कहे जाने वाले गिरिराज सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ रहे कन्हैया कुमार के प्रशंसक वो दिग्विजय सिंह निकले हैं जो भगवा आतंकवाद का नाम दे कर पहले से ही कई हिन्दू समूहों के साथ सांस्कृतिक संगठनो के आक्रोश का शिकार बने हुए हैं…

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यहाँ तक कि कांग्रेस इस बात को ले कर भी नाराज है कि वहां से तेजस्वी यादव ने अपना प्रत्याशी क्यों उतारा ? कहीं इस बात से ये इशारा तो नहीं मिल रहा है कि बेगूसराय से उन्हें कन्हैया कुमार की नाव हिलती नजर आ रही हो ? दिग्विजय सिंह ने कहा कि वो चाहते थे कि बेगूसराय में सिर्फ CPI चुनाव लड़े लेकिन ऐसा नहीं हुआ . उन्होंने खुद बताया कि वो ऐसे हो जाए इसके प्रयास करते रहे . इसी के साथ उन्होंने एलान किया कि कन्हैया कुमार भोपाल में प्रचार करने आ रहा है जिसकी उन्हें ख़ुशी है ..

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अब सवाल ये उठता है कि क्या भारत विरोधी नारों के लिए कुख्यात रहा एक प्रत्याशी कांग्रेस जैसी पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेताओं की पसंद हो सकता है ? ख़ास कर वो जो भगवा आतंकवाद का नारा दे कर एक साध्वी के चुनाव लड़ने को लगातार मुद्दा बनाए हुए हैं जिनके मुह पर वन्देमातरम और भारत माता की जय के नारे हुआ करते हैं .  और क्या ये कहना गलत होगा कि कहीं न कहीं लाल सलाम में सलामी देने वाला हाथ का पंजा कांग्रेस का तो नहीं है ? फ़िलहाल इन सवालों के जवाब आने वाले समय में जनता देने वाली है ..

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