जिस अडानी को बार बार जोड़ा जाता रहा मोदी से, उसी अडानी का रिश्ता निकला कांग्रेस से

2014 में केंद्र में भाजपा सरकार के आने के बाद से लगातार राहुल गाँधी मोदी सरकार पर अडानी के साथ मिलकर भ्रस्टाचार करने का आरोप लगाते आ रहें हैं . आये दिन वो रैलियों और प्रेस कांफ्रेस में मोदी सरकार पर आरोप लगते हुए देखे जाते हैं कि मोदी सरकार अडानी और अम्बानी के लिए काम कर रही है और ये पूंजीपतियों की सरकार है . अभी कुछ दिनों पहले ही राहुल गाँधी ने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा था कि ये सरकार सभी नीतियाँ पूंजीपतियों के लिए लागू कर रही है और केंद्र सरकार को भारतीय रेल के नाम बदल कर अडानी रेल और भारतीय वायुसेना का नाम बदल कर अम्बानी वायुसेना कर देना चाहिए .

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लेकिन अब अडानी तथा कांग्रेस से जुडी वो खबर सामने आई है जो राहुल गांधी तथा कांग्रेस की छद्म हकीकत को बयां करती है. खबर के मुताबिक़, जिन अडानी को राहुल गांधी पानी पी पीकर गाली देते हैं, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार ने कोयला खनन के लिए अडानी को ही चुना है. यहां सवाल खड़ा होता है कि आखिर अडानी तथा कांग्रेस का क्या रिश्ता है? सवाल ये भी है क्या राहुल गांधी जनता को भ्रमित करने के लिए अडानी तथा मोदी सरकार को निशाने पर लेते थे जबकि खुद अडानी कांग्रेस के प्रिय हैं? तथा क्या इसके लिए राहुल गांधी को देश की जनता से माफी नहीं मांगनी चाहिए.

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आपको बता दें कि मोदी सरकार पर भ्रस्टाचार के आरोप लगाने वाली कांग्रेस ने सार्वजनिक क्षेत्र की कम्पनियों को कोयला खनन का अनुभव न होने का हवाला देते हुए एमओडी के आधार पर गिधमुदी और पतुरिया खदानों को  अडानी ग्रुप की निजी कम्पनियों को देने का फैसला किया है . कोंग्रेस सरकार इस फैसले के बाद विवादों में घिर गयी है . छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन के सयोंजक आलोक शुक्ला ने कांग्रेस पार्टी को घेरते हुए कहा है कि  छत्तीसगढ़ में एक के बाद एक कोल खदानें अडानी को दी जा रही हैं. जंगल और आदिवासी हाशिये पर रख दिये गए हैं और कॉरपोरेट के लाभ के लिए सरकार भी इस साजिश में शामिल है.

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 छत्तीसगढ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को घेरते हुए आलोक शुक्ला ने कहा है कि  मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जब विपक्ष में थे तो उन्होंने एमडीओ के ख़िलाफ़ लगातार आवाज़ उठाई थी. लेकिन अब एमडीओ को रद्द करने और इसकी जांच के बजाय नए एमडीओ बनाने से कांग्रेस पार्टी की सरकार संदेह के घेरे में आ गई हैछत्तीसगढ़ कांग्रेस के इस फैसले पर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सचिव संजय पराते ने भी राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाया है उन्होंने कहा है कि “ छत्तीसगढ़ सरकार के इस कदम से सरकारी ख़ज़ाने को 12.5 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा का नुक़सान और निजी कंपनियों को इतना ही फ़ायदा पहुंचाया गया है”

हैरानी की बात ये है कि राहुल गाँधी और कांग्रेस के बाकि नेताओ के अलावा वर्तमान में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी पिछले वर्ष जब विपक्ष में थे तो पानी पी पीकर अडानी को कोसते हुए देखे जाते थे. लेकिन खुद की सरकार आते ही उसी अडानी ग्रुप को कोयला आवंटन के लिए चुनना उनके और कांग्रेस पार्टी के दोहरे रवैया को दर्शाता है. खैर छत्तीसगढ़ सरकार के इस फैसले पर हो रहे विरोध को देखते हुए कि ये बात तो तय है कि अब तक मोदी सरकार पर अडानी को लेकर आरोप लगाने वाली कांग्रेस पार्टी के लिए आने वाले लोकसभा चुनावो में कोयला आवंटन का यह मुद्दा मुसीबत बनेगा क्योंकि देश की जनता ये नहीं समझ पा रही है कि अगर भाजपा सरकार का अडानी भ्रस्टाचारी है तो वही अडानी कांग्रेस शाषित राज्यों में इमानदार कैसे हो गया ?

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