हिन्दुत्ववादी से अचानक धर्मनिरपेक्ष हो गयी कांग्रेस और मांग करने लगी मंत्री श्री हेगड़े को हटाने की

जब भी इस देश को हिन्दू राष्ट्र बनाने की बात की जाती है तो कांग्रेस पार्टी सबसे ज्यादा दुखी हो जाती है। और हिन्दू राष्ट्र बनाने का कड़ा विरोध

करती है। राष्ट्र की उन्नति और हिन्दुओ के हित की बात होती है तो कांग्रेस उसका खुल कर विरोध करती है। कांग्रेस में हिंदू विरोधी नेताओ का जमावड़ा लगा है।

पार्टी में ऐसे नेता भरे पड़े है जो पाकिस्तान के हित की बाते करते है, यहाँ तक की पाकिस्तान जा के हिंदुस्तान का विरोध करते है।

बेकार के मुद्दों से सदन का

समय बर्बाद करना कांग्रेस पार्टी की आदत बन चुकी है।

केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगड़े के एक साधारण से बयान पर कांग्रेस पार्टी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन्हें मंत्री पद से तत्काल हटाने की मांग की है।

दरसल केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री हेगड़े ने सोमवार को कहा था कि भाजपा ‘संविधान बदलने के लिए’ सत्ता में आई है। जिसके बाद कांग्रेस

कार्यकर्ताओ ने राज्यसभा में हंगामा करते हुए उन्हें मंत्री पद से हटाने की मांग कर दी है।

दरअसल हेगड़े के ‘संविधान बदलाव’ को लेकर दिए गए बयान के विरोध में विपक्षी सदस्यों ने राज्यसभा में जमकर हंगामा किया। जिसके बाद सदन को स्थगन के

बाद दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दीया गया। हंगामे की वजह से सदन में शून्यकाल और प्रश्नकाल दोनों नहीं हो पाए। विवादित बयान का विरोध कर

रहे विपक्षी सदस्यों ने उन पर संविधान का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें मंत्री पद पर बने रहने का कोई हक नहीं है।

सदन में हंगामा उस समय शुरू हुआ जब आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाने के क्रम में सभापति एम वेंकैया नायडू ने हेगड़े का नाम पुकारा. ठीक इसी दौरान विपक्षी सदस्यों ने उनके बयान का मुद्दा उठाना शुरू कर दिया। सदन में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा ”अभी तक हमें एक बयान पर

स्पष्टीकरण नहीं मिला और दूसरा बयान आ गया.” आजाद ने सत्ता पक्ष की ओर संकेत करते हुए कहा कि वहां से आए दिन बयान आते रहते हैं.

उन्होंने कहा कि मंत्री ने जो बयान दिया है उस पर उन्हें स्पष्टीकरण देना चाहिए.उन्होंने कहा ”अभी मंत्री सदन में उपस्थित हैं, इसलिए उन्हें स्पष्टीकरण देना

चाहिए. वह कुछ ही देर में सदन से चले जाएंगे.” आजाद को रोकते हुए संसदीय कार्य राज्य मंत्री विजय गोयल ने कहा कि सदन में नोटिस दिए बिना किसी मुद्दे

पर चर्चा नहीं की जा सकती है।

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