कांग्रेस ने नहीं दी है रोज़ा इफ्तार पार्टी जो कभी बन चुकी थी उसकी परम्परा.. सबको याद आ रहे वीर सावरकर के शब्द


कभी वीर सावरकर जी ने कहा था कि जिस दिन हिन्दू एकता के सूत्र में बंध जाएगा उस दिन भारत के तमाम सभी तथाकथित तुष्टिकरण करने वाले नेता खुद को बदल लेंगे .. वर्तमान समय में वीर सावरकर की विचारधारा का सबसे ज्यादा विरोध कांग्रेस पार्टी कर रही है और उनके खिलाफ अपशब्दों तक का प्रयोग राहुल गांधी करते देखे गये . कांग्रेस की सहयोगी पार्टियों ने भी वीर सावरकर के खिलाफ कांग्रेस को खुश करने के लिए मोर्चा खोला जिसमे मुख्य उद्धेश्य था कुछ कट्टरपन्थियो को खुश करना .

लेकिन सावरकार के कथन को उस समय बल मिलता दिखा जब चुनाव के पहले मन्दिर मन्दिर घुमते उन नेताओं को देखा गया जिन्होंने कभी भगवा आतंकवाद और हिन्दू आतंकवाद जैसे शब्दों को खुल कर समर्थन दिया और साधुओं पर निर्ममता से अत्याचार किये .. इस बार के चुनावों में भी हिन्दू और हिंदुत्व एक बड़ा विषय रहा जिसके चलते भारतीय जनता पार्टी एकतरफा जीत दर्ज कर गई.. इस जीत के बाद सबसे ज्यादा बदलाव कांग्रेस पार्टी में होते दिखाई दे रहे हैं .

विदित हो कि दिल्ली में कांग्रेस की प्रादेशिक कार्यकारिणी ने शीला दीक्षित की तरफ से रोजा इफ्तारी का कार्यक्रम जुमे की नमाज़ के बाद रखा तो आशा होने लगी कि अब केन्द्रीय कमान भी रोज़ा इफ्तारी का कार्यक्रम आयोजित करेगा जिसमे राहुल गाँधी और सोनिया गांधी भी शामिल होंगी . लेकिन आख़िरकार ये आशा रखने वालों को निराशा हाथ लगी और कांग्रेस के केन्द्रीय कमान में रोजा इफ्तारी नहीं हुई . ध्यान देने योग्य है कि दो साल के गैप के बाद पिछले साल कांग्रेस ने इफ्तार पार्टी का आयोजन किया था. राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद दो सालों से बंद पड़े सिलसिले को पिछले साल शुरू किया गया था. लेकिन इस साल कांग्रेस पार्टी की तरफ से इफ्तार की कोई तैयारी नहीं है. रोजा इफ्तारी क्यों नहीं हुई इस मुद्दे पर कोई बड़ा नेता बोलने के लिए तैयार दिखाई नहीं दे रहा है लेकिन दबी जुबान से ये कहा जा रहा है कि देश में बने माहौल के चलते कांग्रेस उस छवि से बाहर आना चाह रही है जो उसकी लगातार पराजय का कारण बन रही है .

 

 


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