पहली बार होगा फ़ौज के आंतरिक फैसले का विरोध और वो करेगी कांग्रेस. राष्ट्र के लिए घातक हो सकते हैं परिणाम

राजनैतिक फैसले का विरोध भारत में आम बात है , हर राजनैतिक फैसले को हमेशा पक्ष और विपक्ष से गुजरना पड़ता है और इसे भारत की एक संवैधानिक प्रकिया में गिना जाता है . पर सेना के आंतरिक मामले हों या अदालत के फैसले , इसमें ना पक्ष होता है और ना ही विपक्ष . ये दोनों फैसले केवल और केवल राष्ट्रहित में किये जाते हैं जिनका राजनीति या किसी भी प्रकार के पक्ष या विपक्ष से कोई लेना देना नहीं होता है .

पर अब पहली बार भारत में सेना के आंतरिक फैसले के खिलाफ उतरने जा रही है भारत की सत्ता में सबसे ज्यादा राज करने वाली पार्टी कांग्रेस .वो कांग्रेस जिसे भारत की संवैधानिक प्रक्रिया की पूरी जानकारी है . मामला है BSF की आंतरिक जांच में दोषी पाए गए जवान तेज बहादुर यादव का . तेज बहादुर यादव को BSF ने अपनी जांच के बाद सस्पेंड कर दिया था , इस प्रकार की प्रक्रिया से अभी हाल में ही मेजर गोगोई या पहले कर्नल डी के पठानिया को भी गुजरना पड़ा है .

पर इन जवानो पर पूरी तरह चुप कांग्रेस अचानक ही तेज बहादुर यादव के मुद्दे पर अचानक ही कूद पड़ी है. मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव ने ट्वीट कर के निलंबित BSF जवान तेज बहादुर यादव को भारत माँ का लाल बताते हुए उसे सम्मानित करने की घोषणा की है . शायद इतिहास में ऐसा पहली बार होगा जब सेना के आंतरिक मामलों में इस प्रकार से दखल किया जाएगा .

दखल का रूप ये है कि जिस जवान को BSF दोषी मान रही है उसे कांग्रेस भारत माँ का लाल कैसे मान सकती है .. कांग्रेस का ये कदम निश्चित रूप से एक नए विरोध को जन्म दे सकता है जो बाद में एक नयी परंपरा में बदल सकता है जिसका असर सेना के निर्णयों पर पड़ेगा . 

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