सिखों के नरसंहार के दोषी कांग्रेस के कद्दावर नेता सज्जन कुमार को अदालत ने दी कठोर सजा.. सरदारों का एलान- “जारी रहेगी न्याय की जंग”

समय जरूर लगा लेकिन धर्मरक्षक गुरु गोविन्द सिंह जी के वंशजों के नरसंहार का दोषी कांग्रेस के कद्दावर नेता सज्जन कुमार कानून से बच नहीं पाया. खबर के मुताबिक़, 1984 सिखों के नरसंहार के दोषी कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को अदालत ने उम्र कैद की सजा सुना दी है. दिल्ली हाईकोर्ट ने निचली अदालत का फैसला पलटते हुए सज्जन कुमार को दिल्ली कैंट इलाके में 5 लोगों की हत्या के मामले में आपराधिक साजिश और भीड़ को उकसाने का दोषी पाया है. कोर्ट ने सज्जन कुमार को  दिसंबर तक सरेंडर का आदेश दिया है तो वहीं सज्जन कुमार के दिल्ली छोड़ने पर भी रोक लगा  दी है.

दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा, ‘साल 1947 के विभाजन के दौरान सैंकड़ो लोगों का नरसंहार हुआ था, 37 साल बाद दिल्ली में वैसा ही मंजर दिखा. आरोपी राजनीतिक संरक्षण के चलते ट्रायल से बचते रहे.’ न्यायमूर्ति एस मुरलीधर और न्यायमूर्ति विनोद गोयल की पीठ ने 29 अक्टूबर को सीबीआई, दंगा पीड़ितों और दोषियों द्वारा दायर अपीलों पर दलीलें सुनने का काम पूरा करने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था. सोमवार को न्यायमूर्ति ने इस मामले में अपना फैसला सुना दिया. सज्जन के अलावा कोर्ट ने बलवान खोखर, कैप्टन भागमल और गिरधारी लाल की उम्र कैद की सजा बरकरार रखी है. जबकि पूर्व विधायक महेंद्र यादव और किशन खोखर की सजा बढ़ाते हुए 10-10 साल की जेल की सजा सुना दी है.

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि कांग्रेस नेता सज्जन कुमार ताउम्र जेल में रहेंगे. दिल्ली हाईकोर्ट ने सज्जन कुमार पर फैसला सुनाते हुए कहा कि सत्य की जीत होगी और न्याय होगा. दिल्ली हाईाकोर्ट ने कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को आपराधिक षड्यंत्र रचने, शत्रुता को बढ़ावा देने, सांप्रदायिक सद्भावना के खिलाफ कृत्य करने का दोषी ठहराया. बता दें कि इस फैसले को सुनाते वक्त न्यायाधीश रो पड़े तथा कहा कि कई दशक से लोग न्याय का इंतज़ार कर रहे हैं, ये जांच एजेसिंयों की नाकामी है कि अब तक इस मामले में कुछ नहीं हुआ है. उम्रकैद के अलावा सज्जन कुमार पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. इसके अलावा बाकी दोषियों को जुर्माने के तौर पर एक-एक लाख रुपये देने होंगे.

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