इंस्पेक्टर सुबोध के लिए न्याय मांगने वाले सोहराबुद्दीन मामले में पुलिस वालों को दिलाना चाहते थे फांसी.. अंत मैं हुआ न्याय और देश बोल उठा- “खाकी जिंदाबाद”

2005 के गुजरात के सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में 13 साल बाद सीबीआई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि सोह्राबुद्द्दीन एनकाउंटर फर्जी नहीं था.  सीबीआइ की विशेष अदालत ने सभी 21 पुलिस के जवानों सहित सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया है. सीबीआई कोर्ट ने सभी गवाहों और सबूतों को असंतोषजनक करार देते हुए यह फैसला सुनाया तथा सोहराबुद्दीन शेख-तुलसीराम प्रजापति मुठभेड़ को फर्जी मानने से इन्कार कर दिया है. ज्ञात हो कि सोहराबुद्दीन एनकाउंटर वो एनकाउंटर था जिसने सिर्फ गुजरात ही नहीं बल्कि देशभर में सियासी भूचाल ला दिया था. लेकिन 13 साल बाद अदालत ने जैसे ही अपना फैसला सुनाया वैसे ही देश ने एक सुर में “खाकी जिंदाबाद” का नारा लगाया.

सोहराबुद्दीन एनकाउंटर पर कोर्ट का ये फैसला ये उन लोगों के मुंह पर तमाचा है जो सोहराबुद्दीन को निर्दोष बताते हुए पुलिस के जवानों को सजा दिलाने को पूरी ताकत लगा रहे थे. लेकिन आश्चर्य यही लोग इंस्पेक्टर सुबोध को न्याय दिलाने के लिए ढोंग भी कर रहे हैं. स्पेशल सीबीआइ जज ने अपने आदेश में कहा कि साजिश और हत्या साबित करने के लिए मौजूद सभी गवाह और प्रमाण संतोषजनक नहीं हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि परिस्थिति संबंधी साक्ष्य भी पर्याप्त नहीं है. इसके साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि तुलसीराम प्रजापति की हत्या एक साजिश के तहत हुई, यह बात सच नहीं है.कोर्ट ने साफ़ कहा कि सोहराबुद्दीन तथा प्रजापति एनकाउंटर फर्जी नहीं था. कोर्ट ने कहा कि सीबीआइ इस बात को सिद्ध ही नहीं कर पाई कि पुलिसवालों ने सोहराबुद्दीन को हैदराबाद से अगवाह किया था तथा फिर उसकी ह्त्या की.

ज्ञात हो कि इस मामले में 13 साल बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया. वर्ष 2005 के इस मामले में 22 लोगों पर मुकदमा चलाया गया, जिसमें ज्यादातर पुलिसकर्मी शामिल थे. सीबीआइ की विशेष अदालत ने इस मामले की सुनवाई कर रही थी. मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष के करीब 92 गवाह मुकर गए. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के आरोपित होने के कारण यह मामला सुर्खियों रहा. अमित शाह एनकाउंटर के समय गुजरात के गृह मंत्री थे. वर्ष 2014 में कोर्ट ने भाजपा अध्यक्ष को इस मामले से आरोप मुक्त कर दिया था. मामले में ज्यादातर आरोपी गुजरात और राजस्थान के कनिष्ठ स्तर के पुलिस अधिकारी थे. शुक्रवार को सभी 22 आरोपियों को बड़ी राहत देते हुए कोर्ट ने सभी को बरी कर दिया. अदालत ने सीबीआइ के आरोपपत्र में नामजद 38 लोगों में से 16 को पहले ही सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था. इनमें राजस्थान के तत्कालीन गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया, गुजरात पुलिस के पूर्व प्रमुख पीसी पांडे और गुजरात पुलिस के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी डीजी वंजारा शामिल हैं.

गौरतलब है कि गुजरात एटीएस और राजस्थान एसटीएफ ने अहमदाबाद के नजदीक एनकाउंटर में मध्य प्रदेश के अपराधी सोहराबुद्दीन शेख को मार गिराया था. इसके एक साल बाद सोहराबुद्दीन के सहयोगी तुलसीराम प्रजापति को भी एक मुठभेड़ में मार गिराया गया था. 2010 से इस मामले की जांच सीबीआई कर रहा था. सीबीआइ के मुताबिक, आतंकियों से संबंध रखने वाला कथित गैंगेस्टर शेख, उसकी पत्नी कौसर बी और उसके सहयोगी प्रजापति को गुजरात पुलिस ने एक बस से उस समय अगवा कर लिया था, जब वे लोग 22 और 23 नवंबर 2005 की दरम्यिान रात हैदराबाद से महाराष्ट्र के सांगली जा रहे थे. सीबीआइ के मुताबिक, शेख की 26 नवंबर 2005 को अहमदाबाद के पास कथित फर्जी मुठभेड़ में हत्या कर दी गई. उसकी पत्नी को तीन दिन बाद मार डाला गया और उसके शव को ठिकाने लगा दिया गया. आरोप था कि साल भर बाद 27 दिसंबर, 2006 को प्रजापति की गुजरात और राजस्थान पुलिस ने गुजरात-राजस्थान सीमा के पास चापरी में कथित फर्जी मुठभेड़ में गोली मार कर हत्या कर दी.

सोहराबुद्दीन केस सुप्रीम कोर्ट के आदेश से सीबीआइ को सौंपा गया था. सीबीआइ ने सुप्रीम कोर्ट में यह मांग की थी कि इस केस की सुनवाई गुजरात के बाहर की जाए. कोर्ट ने इसकी मंजूरी दी और मुंबई में केस ट्रांसफ़र कर दिया गया. सीबीआइ ने जब सुप्रीम कोर्ट से केस ट्रांसफर करने की मांग की थी, तब यह दलील दी थी कि गवाहों पर दबाव न डाला जाए और वे पलट न जाए. लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद सीबीआइ की विशेष अदालत ने सोहराबुद्दीन शेख-तुलसीराम प्रजापति मुठभेड़ को फर्जी मानने से इन्कार कर दिया है तथा सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया है.

 वो नाम जिन्हें सीबीआई कोर्ट ने शुक्रवार को बरी किया है
1. मुकेश कुमार लालजी भाई परमार  ( A-4 ) – तत्कालीन डीएस पी
 आरोप- सोहराबुद्दीन और कौसर बी को लाने में मदद और गलत जांच की
2. नारायण सिंह हरि सिंह धाबी (A-5)- इंस्पेक्टर, गुजरात ए टी एस
आरोप-  सोहराबुद्दीन पर गोली चलाई
3. बालकृष्ण राजेन्द्र प्रसाद चौबे (A-6)- इंस्पेक्टर , गुजरात ए टी एस
आरोप- सोहराबुद्दीन के एनकाउंटर टीम का सदस्य और मौके पर मौजूद
4. रहमान अब्दुल रशीद  खान ( A-7)- इंस्पेक्टर , राजस्थान पुलिस
आरोप- सोहराबुद्दीन का एनकाउंटर करने वाली टीम का सदस्य, मौके पर मौजूद, गोली चलाई और खुफिया सूचना होने का दावा. एफ़ आई आर रजिस्टर्ड कराई.
5. हिमांशु सिंह राजावत ( A-8) – सब इंस्पेक्टर , राजस्थान पुलिस
आरोप- सोहराबुद्दीन पर गोली चलाई
6. श्यामसिंह जयसिंह चरण (A-9)- सब इंस्पेक्टर, राजस्थान पुलिस
आरोप- सोहराबुद्दीन पर गोली चलाई
7. अजय कुमार भगवानदास परमार (A-10) – सिपाही, गुजरात पुलिस
आरोप- सोहराबुद्दीन का एनकाउंटर करने वाली टीम का सदस्य
8. संतराम चंद्रभान शर्मा (A-11)- सिपाही, गुजरात पुलिस
आरोप- सोहराबुद्दीन का एनकाउंटर करने वाली टीम का सदस्य
9. नरेश विष्णुभाई चौहान (A-13) – सब इंस्पेक्टर, गुजरात पुलिस
आरोप- कौसर भी फार्म हाउस में बंद कर रखने और फिर शव को नष्ट करने में मदद
10. विजयकुमार अर्जुभाई राठौड़ (A-14)- इंस्पेक्टर, गुजरात पुलिस
आरोप- कौसरबी को गायब करने के साजिश में शामिल
11. राजेन्द्रकुमार जीरावला ( A-19)- अरहान फार्म हाउस का मालिक
आरोप- कौसर बी को बंद कर रखे जाने की ज़ानकारी ओर मदद
12. घट्टमनेनी श्रीनिवास राव ( A- 23)- सब इंस्पेक्टर, आंध्रप्रदेश पुलिस
आरोप- सोहराबुद्दीन और कौसर बी का गुजरात तक लाने में मदद
13. आशीष अरुणकुमार पंड्या ( A-25) – सब इंस्पेक्टर , गुजरात पुलिस
आरोप- तुलसी प्रजापति पर गोली चलाई
14. नारायण सिंह फते सिंह चौहान ( A-26)
15- युवधिरसिंह नाथूसिंह चैहान ( A-27)
16. करतार सिंह यादराम जाट ( A-29)
17. जेठू सिंह मोहनसिंह सोलंकी ( A-30)
18. कानजीभाई नरनभाई कच्छी ( A- 31)
19. विनोदकुमार अमृतकुमार लिम्बाचिया ( A- 32)
20. किरणसिंह हलाजी चौहान ( A- 33)
21. करणसिंह अर्जुनसिंह सिसोदिया( A-34)
22. रमनभई कोदारभाई पटेल ( A-38)- गुजरात CID का जांच अधिकारी
आरोप – सोहराबुद्दीन मुठभेड़ जांच में लीपापोती….
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