झूम उठा बिसहडा. सत्य की जीत के साथ एक बार फिर जनअपेक्षा पर खरा उतरा सुदर्शन

जिस दादरी को तमाम नेताओं ने अपना तीर्थ स्थल बना दिया था , जिस अख़लाक़ के लिए तमाम लोगों ने अपने अपने हिसाब से हिन्दुओं को दोषी बताया .  जिस बिसाहड़ा को कुछ लोगों ने संयुक्त राष्ट्र संघ तक प्रसिद्ध कर दिया उस दादरी में सत्य के साथ खड़ा रहा सुदर्शन . अपनी बात पर अटल और अडिग .

उस समय उन हिन्दुओं की आवाज बने सुदर्शन न्यूज की आवाज का सुखद फल तब आया जब बहुचर्चित दादरी के बिसाहड़ा गाँव में गौमांस मिलने की घटना पर अखलाक की हत्या के मामले में अनावश्यक रूप से फंसाये दो आरोपियों को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत दे दी . यद्द्पि अपनी जमानत के लिए इन दोनों को पहाड़ जैसा 2 साल का इंतज़ार करना पड़ा और इसी बीच एक अन्य फंसाये गए आरोपी की जेल में ही मौत हो गयी जिसे उसके परिवार वालों ने सार्वजनिक रूप से हत्या बताया 

सुदर्शन गौ रक्षको की आवाज बन कर अंत तक बोलता रहा और सत्य बताता रहा कि अख़लाक़ ने गौ हत्या की थी और उसके बदले में हिन्दुओं को मिल रही सज़ा निश्चित रूप से संतुलित और न्यायपूर्ण नहीं है . पर एकतरफा आँख कान बन्द कर के सिर्फ अख़लाक़ नाम रट रही तत्कालीन सरकार जहां एक तरफ अख़लाक़ के घर पर सरकारी खाज़ने की बौझार करती रही वहीँ दूसरी तरफ दोषियों के साथ तमाम उन निर्दोष लोगों को भी कानूनी जाल में फंसाती रही जिनका इस केस से कोई वास्ता भी नहीं था . 

जमानत पाने वाले आरोपियों के नाम पुनीत शर्मा और अरूण हैं जिन्हे पुलिस ने अख़लाक़ हत्याकांड के 3 माह बाद गिरफ्तार किया था. इन दोनों को गिरफ्तार सिर्फ अख़लाक़ की बेटी शाहिस्ता के कहने पर किया गया था अख़लाक़ की हत्या में शामिल थे. शाहिस्ता के इस बयान ने इन दोनों के जीवन पर ग्रहण लगा दिया था . 

ज्ञात हो कि विगत 28 सितंबर 2015 को दादरी के बिसाहड़ा गांव में गोकशी के आरोपी अखलाक की हत्या कर दी थी.  इस मामले में 19 लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी. न्याय मिलने से उत्साहित गाँव वालों ने सुदर्शन न्यूज की टीम को धन्यवाद करते हुए जेल में बंद बाकी अन्य आरोपियों के भी जल्द ही रिहा होने की उम्मीद जताई है . 

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