सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ उतरे मजहबी कट्टरपंथी…साफ़ साफ़ बोला कि- “कोई 4 औरतें रखे तो इसमें सुप्रीम कोर्ट को क्या दिक्कत”

जब हिन्दुस्तान के लोकतान्त्रिक देश है तब यहाँ संविधान का कानून चलेगा न कि कोई मजहबी कानून या शरीयत का कानून चलेगा. लेकिन शायद मजहबी कट्टरपंथियों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. ये मजहबी कट्टरपंथी लोग आये दिन कुछ न कुछ ऐसी हरकतें करते रहते हैं जो देश के संवैधानिक कानून के विरुद्ध हैं. अब उन्होंने खुलकर न्यायपालिका के खिलाफ बोलना शुरू कर दिया है. अभी तक उन्होंने तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को मानने से मना किया था और अब उन्होंने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट को चुनौती दी है.

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा है कि मुसलमान 4 बीबी रखता है तो इसमें सुप्रीम कोर्ट को क्या दिक्कत?  AIMPLB के जनरल सेक्रेटरी मौलाना वली रहमानी ने कहा है कि इस्लाम में तीन तलाक, हलाला, बहुविवाह को स्वीकृति दी गयी है तब सुप्रीम कोर्ट इसकी खिलाफात करने वाला कौन होता है. मौलाना वली रहमानी ने कहा कि हमारे लिए इस्लामिक लॉ मानना जरूरी है और हम वही मानेंगे. उन्होंने कहा हम सुप्रीम जायेंगे तथा बतायेंगे कि वह हमारे व्यक्तिगत मामलों में दखल न दे.

ज्ञात हो कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही तीन तलाक पर रोक लगाने का आदेश दे चुका है और उसके लिए लोकसभा से कानून भी पास हो चुका है हालाँकि राज्यसभा से पास होना बाकी है. अब बीजेपी लीडर अश्विनी उपाध्याय के निकाह हलाला और बहुविवाह के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. इन याचिकाओं में अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि निकाह हलाला तथा बहुविवाह न सिर्फ मानवता के खिलाफ हैं बल्कि सभी समाज के लिए कलंक भी हैं. याचिका में कहा गया है कि हलाला के नाम पर महिलाओं का यौन शोषण किया जाना, महिलाओं को उपभोग की वस्तु समझा जाना बहुत ही शर्मनाक है. इसके साथ ही बहुविवाह के खिलाफ भी यही तर्क दिए गये हैं कि जब व्यक्ति पहले से शादीशुदा है उसके बाद भी दूसरी शादी करना महिलाओं के मौलिक अधिकारों का हनन है, महिलाओं की प्रगति में वधक है. अश्विनी उपाध्याय की इन याचिकाओं पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है.

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