Breaking News:

अम्बेडकर जी की मूर्ती तोड़ने वाले का नाम जान कर शासन तक है हैरान…पर्दा उठा है एक ऐसे राज से जिससे राष्ट्र हुआ सन्न

त्रिपुरा के बेलोनिया शहर में विदेशी मार्क्सवादी नेता व्लादिमीर लेनिन की मूर्ती गिराए जाने के बाद देश में अन्य कई जगहों पर भी मूर्तिया गिराई गईं, तोडी गईं. एक और कोलकाता में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मूर्ती तोडी गयी तो वहीं उत्तर प्रदेश के मेरठ तथा आजमगढ़ में अंबेडकर की मूर्ती तोडी गयी. अम्बेडकर की मूर्ती तोड़े जाने के बाद देश में बबाल शुरू हो गया. अब आजमगढ़ में अम्बेडकर की मूर्ती तोड़े जाने के मामले में एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है जिसे जानकर शासन से प्रशासन तक हैरान रह गया है.

खबर के मुताबिक़ आजमगढ़ जिले के कप्तानगंज थाना क्षेत्र के राजपट्टी गांव में अम्बेडकर की मूर्ती किसी और ने नहीं बल्कि एक दलित ने ही तोडी थी. आजमगढ़ में अम्बेडकर की प्रतिमा तोड़ने के आरोपी राम अवध को पुलिस ने गिरफ्तार कर किया है. राम अवाध उसी राजपट्टी गाँव का रहने वाला है जिस गाँव में मूर्ती तोडी गयी थी. सबसे आश्चर्यजनक बात ये है मूर्ती तोड़ने वाला राम अवध दलित समाज से ही ताल्लुक रखता है. खबर के मुताबिक दलित राम अवध ने रात को हथौड़े से अम्बेडकर की प्रतिमा का सर तोड़ दिया था.

अब इससे एक बात स्पष्ट हो जाती है कि हिन्दू समाज को बदनाम करने के लिए हिन्दू समाज को विघटित करने के लिए एक साजिश के तहत एक दलित युवक ने ही अम्बेडकर की प्रतिमा को ढहा दिया. मूर्ती तोड़े जाने के पीची राम अवाध का मकसद था इस बहाने संघ व भाजपा पर हमला किया जाएगा तथा हिन्दू समाज का विघटन होगा. राम अवध तथाकथित दलित समाज की राजनीति करने वाली एक राजनैतिक पार्टी से सम्बन्ध रखता है. यही नहीं राम अवध को ऐसी पार्टियों से फंडिंग भी मिलती है. इनकी सोच कितने निम्न स्टार की है तथा हिन्दुओं के प्रति कितनी कटुता भरी हुई है कि ये लोग जिन अम्बेडकर के आदर्शों को मानते हैं वहीं अपनी राजनीति के लिए उन्हीं अम्बेडकर की मूर्ती को भी स्वयं ही तोड़ देते हैं. इससे इनके देश विरोधी चरित्र का पता चलता है.

दलित युवका द्वारा जिस तरह से अबेडकर की प्रतिमा तोडी गये तथा हिन्दू समाज को तोड़ने का प्रयास किया गया वो एक बहुत बड़ा षड्यंत्र है. अब पुलिस को अन्य जगह तोडी गयी मूर्तियों की भी गहनता से तहकीकात करनी चाहिए ताकि इसके पीछे की साजिशो का पता लगाया जा सके. इससे एक बात तो स्पष्ट होती हो चुकी है कि हिन्दू समाज को तोड़ने वाली शक्तिया एक बार पुनः सक्रिय हो चुकी हैं और इस बार माध्यम बन रही हैं मूर्तिया. हिन्दू समाज को तथा प्रशासन को भी इससे सतर्क रहने की आवश्यकता है क्योंकि इसके पीछे का इनका मकसद सिर्फ हिन्दू समाज को तोड़ना नहीं है बल्कि इसके बहाने देश में अराजकता फैलाकर देश को विघटित करना है.

Share This Post