UP का जहीर त्रिपुरा में कपडे बेचने गया था या थी कोई और वजह जिसे वहां भीड़ ने दे दी मौत ? गुलज़ार और खुर्शीद भी उसके साथ थे

एक बार फिर से तलाशा जा रहा है भीड़ का मत और मजहब . फिर से वही हल्ला और वही हंगामा मचाने की चलने लगी कोशिशे लेकिन इस हल्ले हंगामे के बाद भी सवाल ज्यों का त्यों खड़ा है कि पूर्वोत्तर से उत्तर प्रदेश और दिल्ली आदि आ कर कमाने की घटनाए तो सामान्य हैं लेकिन कोई उत्तर प्रदेश से पूर्वोत्तर क्यों गया और क्या वजह थी कि वो ऐसे क्षेत्र में गया जहाँ कई लोग ब्च्चाचोरी जैसी घटनाएं झेल रहे थे .  

विदित हो कि पूर्वोत्तर के राज्य त्रिपुरा में गुरुवार को मॉब लिंचिंग की घटना सामने आई है जिस पर तथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग अपना अपना एंगल तलाश रहा है । यहाँ पर बच्चा चोरी की घटनाओं से आम जनता काफी परेशान थी और उसी के चलते ही भीड़ ने बच्चा चोरी के शक में तीन लोगों की जमकर पिटाई की और तब तक मारा जब तक उन तीनो में एक मर नहीं गया और बाकी दो भी उसी हाल को पहुच जाते अगर मौके पर पुलिस बल न आ गया होता तो ..प्राप्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यह सनसनीखेज घटना पश्चिमी त्रिपुरा के आदिवासी बहुल मुराबारी गांव में घटी, यद्दपि पिटाई के शिकार हुए तीनो के परिवार वालों का कहना है कि वो फेरी वाले बन कर कपडा बेच रहे थे लेकिन स्थानीय जनता के गले ये बात उतर नहीं रही है . स्थानीय जनता के दावे और मृतक के परिवार वालों के दावे में कौन सही है ये पुलिस की जांच का विषय है लेकिन उत्तर प्रदेश से निकल कर त्रिपुरा के उस बेहद अछूते क्षेत्र में जाना कहीं न कहीं इन तीनो की कही बात पर सवाल खड़ा कर रहा है .

कुछ दिन पहले उसी क्षेत्र में पुरना विश्वास की हत्या कर दी गयी थी तब से स्थानीय जनता खुद पहरा दे रही थी. भीड़ ने इन तीन को संदिग्ध रूप में उधर घुमते देखा तो हिंसक हो उठी और इन तीनो को दौड़ा लिया.. इस हमले में उत्तर प्रदेश निवासी 30 साल के जहीर कुरेशी को तब तक मारा गया जब तक उनकी मौत नहीं हो गयी और जबकि गुलज़ार और खुर्शिद खान को बचाने के लिए सुरक्षा बल आ गये जिसमे खुद कई सुरक्षाकर्मी घायल हो गये लेकिन उन्होंने गुलज़ार और खुर्शीद का हाल जहीर जैसा होने से बचा लिया , अब ये दोनों  हॉस्पिटल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। जहीर की तरह गुलज़ार और खुर्शीद भी उत्तर प्रदेश के निवासी हैं . 

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