गुजरात की किताबों में माँ सीता का अपमान.. प्रभु श्री राम के बारे में बेहद अशोभनीय शब्द

हिन्दू देवी देवताओं के साथ साथ हिन्दू परम्पराओं का उपहास उड़ाने वालों का दुस्साहस इसी से नापा जा सकता हैं . ये वही लोग हैं जिन्होंने बेधड़क अंग्रेजो के नाम के आगे आज तक सर लगाया है और देश के लिए मर मिटने वाले क्रांतिकारियों को आतंकी तक लिखा .. ये वही है जिन्होंने भारत के स्वर्णिम इतिहास कर कभी काले रंग से और कभी हरे रंग से रंग दिया और आक्रांताओ को हीरो और योद्धाओ को आक्रांता बना कर पेश कर दिया है . 

एक बार फिर वैसे ही दुस्साहस को दोहराने की कोशिश की गयी है जब गुजरात बोर्ड की 12वीं कक्षा की संस्कृत की किताब में माता सीता और दुनिया भर के हिन्दू समाज के आराध्य प्रभु श्री राम के बारे में लिखा गया बेहद आपत्तिजनक और घोर निंदनीय शब्द . इस किताब में लिखा गया है कि “सीता का अपहरण रावण ने नहीं, बल्कि राम ने किया था.”. ये चुनौती सीधे सीधे हिन्दुओ के सहिष्णुता और सहनशीलता को दी जा रही है जिस पर कड़ी प्रतिक्रिया आने की संभावना है . पुस्तक के इस खंड के आते ही हिन्दू संगठन आक्रोशित हो गए और उन्होंने ऐसा लिखने वाले को एक विदेशी साजिशकर्ता करार देते हुए फ़ौरन ही कड़ी धाराओं में गिरफ्तार करने की मांग की है . 

एक तरफ भारतीय जनता पार्टी अपने बिखर रहे वोटो को जोड़े रखने के लिए हर सम्भव कोशिश कर रही है वही उनके ही अधीनस्थों के द्वारा हिन्दू समाज को आंदोलित कर देने वाले ऐसे कुकृत्य से आम जनता का आक्रोश और अधिक भड़कने की संभावना है . अंग्रेजी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया के हवाले से बताया गया है कि किताब के पेज नंबर- 106 पर लिखा है, “जब राम ने सीता का अपहरण कर लिया तो लक्ष्मण ने राम से कुछ बेहद मार्मिक बातें कहीं.” इसके मुख्य जिम्मेदार हैं भारतीय जनता पार्टी शासित राज्य गुजरात के बोर्ड ऑफ़ स्कूल टेक्सबुक्स के अध्यक्ष डॉ. नितिन पेठानी.. जब इस बारे में उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ऐसा अनुवाद की ग़लती की वजह से हो गया. लेकिन क्या इतने उच्चस्थ पद पर बैठे इस व्यक्ति से इतना बड़ी गलती की आशा की जा सकती है ? ये मात्र लिपकीय त्रुटि है या कोई बड़ी साजिश इसका खुलासा धर्मनिष्ठ मांग रहे हैं . 

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