IG अमिताभ ठाकुर पर गिरा था कांग्रेसी कहर जब उनकी पत्नी ने विपत्ति से घिरे दरोगा शैलेन्द्र सिंह की करनी चाही थी मदद

ये वो राजनीति है जो अजमल कसाब को वकील देना मानवता समझती है . 

ये वही राजनीति है जो सुप्रीम कोर्ट से फांसी पाए अफ़ज़ल गुरु के लिए राष्ट्रपति को माफ़ी की चिट्ठी तक लिखवाती है ..

ये वही राजनीति है जो याकूब के लिए आधी रात को कोर्ट खुलवाने को भी अपना संवैधानिक अधिकार समझती है . 

ये वही राजनीति है जो बौद्धों के कातिल रोहिंग्या घुसपैठियों को भारत में ससम्मान रखने की पैरवी करती है .

ये वही राजनीति है जो भारत को तबाह कर रहे बंगलादेशियो को संरक्षण देती है .

पर उसी राजनीति में जहाँ आफत में घिरा एक पुलिस का अधिकारी चीख चीख कर मर जाए तो भी उसके लिए मदद तो दूर उसकी मदद के लिए उठने वाले अन्य हाथों को भी तोड़ने के लिए दौड़ पड़ती है . भारत के जिस विभाग को आप सबसे ज्यादा प्रभावी और मजबूत मानते होंगे उस विभाग का नाम पुलिस है पर जब आप जेलों में बंद पुलिस के कई अधिकारियो से मिलेंगे तब आप को उनकी दशा पर रोना आएगा .. भले ही वो अधिकारी उत्तर प्रदेश की रायबरेली जेल में बंद उत्तर प्रदेश पुलिस का सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह हो या हिमांचल प्रदेश की कोटखाई गैंगरेप के मामले में कांग्रेस सत्ता द्वारा बलि का बकरा बना दिए गए कुछ पुलिसकर्मी ..

उत्तर प्रदेश इलाहाबाद कोर्ट परिसर में में नबी अहमद की हत्या के आरोप में जेल भेजे गए उत्तर प्रदेश पुलिस सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह का परिवार उनके जेल जाने के बाद बदहवास था क्योकि हर तरफ शैलेन्द्र को फांसी दो के नारे लग रहे थे और उनकी पत्नी को हत्यारे की बीबी या खुद हत्यारिन तक बोल कर हर जगह बेइज्जत किया जा रहा था . उनके बच्चो को तो पता ही नहीं था की उनकी माँ को हर तरफ लोग ताने क्यों मार रहे हैं .. बस वो पुछा करते थे की मम्मी क्या पापा बच जाएंगे .. इन हालातो में सत्ता के शीर्ष पर बैठे थे अखिलेश यादव जिनका साफ़ आदेश था की नबी अहमद के साथ न्याय हो पर न्याय की उस लिस्ट में कही भी सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह का परिवार या वो खुद नहीं थे जो अंत समय तक चीखते रहे की हमला उन्होंने नहीं बल्कि खुद उन पर हुआ है जिसके वीडियो भी हैं .. लेकिन साहब कहाँ एक मुख्यमंत्री और कहा एक साधारण सा पुलिस अधिकारी और वोट भी पुलिस वाले की खिलाफत कर के ही मिलने वाले थे , वो उन्होंने वही किया जो वोट पैदा करता .. 

यहाँ सबसे अजीब बात कांग्रेस के पक्ष की रही . विपत्ति से घिरा शैलेन्द्र सिंह का परिवार जिसमे मूल रूपों से उनकी पत्नी ही थी जिस चौखट पर जाती थी वहां से या तो दुत्कार मिलती थी या तो निराशा . अगर कहीं बहुत कुछ मिल गया तो केवल आश्वासन वो भी भगवान से जुड़ा .. की चिंता मत करो , भगवान पर भरोसा रखो .. सब ठीक हो जाएगा .. आखिर किसी की क्या मज़ाल तो अल्पसंख्यको के लिए हर पल चिंतित अखिलेश यादव के कोप को झेले .. इसी समय पुलिस विभाग के एक IG जिनका नाम अमिताभ ठाकुर है और जो अपने तेजतर्रार छवि के साथ कर्त्तव्यनिठा के लिए भी जाने जाते हैं उनकी पत्नी श्रीमती नूतन ठाकुर ने इस पुलिस सब इंस्पेक्टर की अकेले बदहवास हो कर भटक रही पत्नी की मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाया और उनका साथ देने का आश्वासन दिया . 

फिर अचानक ही इस मामले में सामने आई कांग्रेस . कांग्रेस के इलाहाबाद क्षेत्र से विधायक अनुग्रह नारायण सिंह ने इस मामले में अपनी धमाकेदार इंट्री करते हुए इस मुद्दे को विधानसभा में उछाला दिया .. आखिर उन्हें अपना नाम जो करना था . शायद उन्होंने सोचा की यदि समाजवादी पार्टी एक पुलिस सब इंस्पेक्टर को प्रताड़ित कर के इतना चर्चा में आ रही है तो वो सीधे IG पर वार करें और उस से बड़ा खुद को साबित करें . हालात तो ये हो गए की अनुग्रह नारायण सिंह ने इस मुद्दे को ले कर सीधे सीधे IG अमिताभ ठाकुर पर कार्यवाही की मांग कर डाली और इसी राजनीति के चलते उत्तर प्रदेश ही नहीं भारत के सबसे काबिल अफसरों की लिस्ट में गिने जाने वाले IPS अधिकारी अमिताभ ठाकुर जी को सफाई देने पर मजबूर होना पड़ा था . यद्द्पि उन्होंने अपनी सफाई में ये कहा था की ये मदद उनकी पत्नी श्रीमती नूतन ठाकुर जी कर रही हैं और वो संवैधानिक रूप से स्वतंत्र हैं.. असल में कांग्रेस विधायक का ये कार्य पूरे प्रदेश की पुलिस को दिया गया एक ट्रेलर जैसा था जो एक इशारा था सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह को अकेला छोड़ देने और तिल तिल कर मरने देने के लिए . माना ये भी जा सकता है की IG अमिताभ ठाकुर की मुलायम सरकार में अंतहीन प्रताड़ना कारणों में एक कारण ये भी था .. 


इस मामले में राजनेताओं का सबसे बुरा पहलू ये रहा की उन्होंने इस पूरे विवाद को वकील बनाम पुलिस बना कर पेश किया जबकि कई राष्ट्रवादी वकीलों को भी सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह के परिवार की दुर्दशा से हमदर्दी थी .. अफ़सोस इस मामले में मीडिया के कुछ स्तम्भों ने भी अपनी भूमिका का सही से निर्वहन नहीं किया था और समाज को जोड़ने के भाषण देने वाले सपाई और कांग्रेसी नेता समाज को वकील और पुलिस में बांटते रहे जबकि कई घरों में दो भाइयो में एक पुलिस में है और दूसरा वकील … नेताओं के और उस ख़ास मीडिया के शोर में ना सिर्फ शैलेन्द्र सिंह के परिवार की चीखें , अमिताभ ठाकुर जी की दलीलें अपितु राष्ट्रवादी वकीलों की वो आवाज भी कहीं दब गयी जो चाह रहे थे की इस मामले को बिना तूल दिए शैलेन्द्र सिंह की बात को सुना जाय और इसका परिणाम ये निकला की आखिर में कईयों ने वकीलों को बदनाम करने का प्रयास किया तोड़फोड़ आदि के मामले में जबकि वकील भी कानून के नियम जानते हैं जिन्हे कानून तोड़े जाने की संभावना न के बराबर है . 


कुल मिला कर नेताओं द्वारा रचे गए इस मामले में अब शैलेन्द्र सिंह को न्याय की आशा है जिसमे समाज का हर वर्ग चाहे वो पुलिस में हो या वकील में हो वो इस मुद्दे पर एकमत होने को तैयार है .. अदालत के आगे सभी साक्ष्य आदि मजूद हैं , प्रस्तुतिकरण प्रदेश की सरकार को करना है . आशा है की राष्ट्रभक्त व धर्मनिष्ठ पुराने तथाकथित राजनेताओं द्वारा रचे गए इस साजिश को समझ पाएंगे और ना सिर्फ सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र का न्याय होगा अपितु राष्ट्रभक्त वकीलों से भी तोड़फोड़ और बवाल आदि का कलंक मिटेगा और पुलिस वकील साथ मिल कर कानून की रक्षा करना शुरू करेंगे … कांग्रेस ये यहाँ ये सवाल जरूर बनता है की उनकी नजर में साध्वी प्रज्ञा के नाम से संत आतंकी , कर्नल पुरोहित व् मेजर उपाध्याय के नाम से सेना साम्प्रदायिक व् सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र के नाम से पुलिस भी हत्यारी है क्या ? क्या ये ही है कांग्रेस की नीति ? 

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