उसने अपनी देहदान की गरीबों और जरुरतमंदों के लिए…अचानक ही आ गया फतवा क्योंकि बताया गया उसकी देह उसकी नहीं है

आजकल इंसान मानवता के नाते कई अच्छे कार्य करता है. इसके लिए कोई नेत्र दान करता है कोई रक्त दान करता है कोई किडनी दान करता है तो कोई किसी शोध या अन्य कार्य के लिए अपना पूरा शरीर दान कर देता है. और ऐसा कार्य करने वाले निश्चित ही तारीफ के हकदार होते हैं समाज के अनुकरणीय होते हैं.लेकिन उसके बाद भी समाज में ऐसी विकृत मानसिकता के लोग मौजूद हैं, रूढ़िवादी मजहबी मानसिकता के लोग भी मौजूद हैं जो अंगदान जैसे महान तथा सामाजिक कार्य को मजहब के बिरुद्ध मानकर अंगदान करने वाले के खिलाफ फतवा जारी कर देते हैं. 

ताजा मामला उत्तर प्रदेश से जुड़ा हुआ है, कानपुर में रामा डेंटल कॉलेज के महाप्रबंधक डॉ. अरशद मंसूरी ने मेडिकल छात्र-छात्राओं को शोध के लिए अपना शरीर दान करने का फैसला किया है. जिसके विरोध में उनके खिलाफ फतवा जारी कर दिया गया है. कानपुर के नई सड़क स्थित मदरसा एहसानुल मदारिस के मुफ्ती हनीफ बरकाती ने शरीर दान को इस्लाम के खिलाफ तथा गुनाह बताते हुए अंग दान या शरीर दान को गुनाह बताया है.

मुफ्ती हनीफ बरकाती ने अपने फतवे में कहा है  “इंसान अपने शरीर और रूह का मालिक नहीं है. यह अल्लाह की दी अमानत है. इस्लाम में किसी की मौत के बाद जनाजा (शव) को सामने रखकर नमाज अदा की जाती है, उसे कांधों पर रखकर कब्रिस्तान ले जाते हैं और सुपुर्द-ए-खाक करते हैं. कब्र पर पैर पड़ जाना तक गुनाह है तो मरने के बाद चीरने फाड़ने के लिए शरीर को दान नहीं दिया जा सकता है. वह या कोई भी मुफ्ती हों, देहदान के समर्थन में फतवा नहीं दे सकते हैं. जिस तरह खुदकुशी करना हराम है, उसी तरह मरने के बाद अपने शरीर का दान करना भी हराम है.”

अपने ऊपर फतवा जारी होने के बाद डॉ. अरशद मंसूरी ने कहा है कि वह इस फतवे से दुखी हैं. उन्होंने कहा है कि में मुस्लिम समुदाय के युवाओं से अपील करता हूँ कि वो मेरे इस नेक कार्य में मेरा समर्थन करें तथा रूढ़िवादी कुप्रथाओं को त्यागें तथा समाज हित में कार्य करें. डॉ. मंसूरी ने कहा कि देहदान करना कानूनी तौर पर वैध है. भारतीय होने के नाते देहदान करना उनके लिए गौरव की बात है. वह खुद को पहले भारतीय मानते हैं, बाद में मुसलमान.

शरीर दान के खिलाफ फतवा जारी करना वास्तव में आश्चर्यजनक है. इस बहाने पूरा देश देख रहा है कि किस तरह समाज हित के लिए मानवता के लिए राष्ट्र हित में अपना शरीर दान करने वाले व्यक्ति को इस नेक कार्य करने से रोका जा रहा है उसके खिलाफ फतवा निकाला जा रहा है. निश्चित रूप से ये फतवा मुसलमानों की प्रगति, मुसलमानों की उन्नति में बहुत बड़ी बाधा बनेगा. आज के प्रगतिशील समय में सामाजिक हित के लिए कार्य करने वाले के खिलाफ फतवा जारी करना उस समाज के लिए बहुत ही शर्मनाक है,

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