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बलात्कारी को रिहा करते हुए बोली अदालत- “17 साल की हो तो क्या हुआ, शरियत के हिसाब से 14 साल में ही जवान हो चुकी थी ” . भारत में शरिया की आहट

न इस से पहले शायद ऐसा देखा गया और न ही इस से पहले शायद ऐसा कुछ सूना गया है . सब जानते हैं कि भारत का संचलन देश के संविधान के हिसाब से चलता है जिसको बहुसंख्यक जनता सर माथे पर लगा कर स्वीकार भी करती है. हर बार कहा जाता है कि आस्था और व्यक्तिगत नियम कभी संविधान से ऊपर नही हो सकते हैं लेकिन उस समय के बारे में क्या कहा जाएगा जब देश की ही अदालत उसी शरिया नियम से फैसला देने लगे .

ये सनसनीखेज फैसला आया है भारत की ही राजधानी दिल्ली की एक अदालत द्वारा जिसने ने पॉक्सो एक्ट के तहत गिरफ्तार बलात्कार के एक आरोपी को बरी कर दिया इस बरी किये जाने के पीछे हवाला दिया गया है इस्लामिक कानूनों का . कोर्ट ने अपनी टिपण्णी में साफ़ साफ़ कहा है कि आरोप लगाने वाली पीड़िता मुस्लिम है और इस्लामिक क़ानून अर्थात शरीयत के मुताबिक 14 की उम्र में लड़कियां यौवन हासिल कर लेती हैं। इस पूरे मामले की रिपोर्ट लड़की के अब्बा ने 29 नवंबर, 2013 को अपनी लड़की को नाबालिग बताते हुए दर्ज करवाई थी जिस पर पुलिस ने कार्यवाही कर के अभियुक्त को पकड भी लिया था . 

यहाँ लड़की के अब्बा ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी 17 साल 5 महीने की बेटी को पड़ोस में ही रहने वाले एक आदमी ने उसका अपहरण कर लिया है . बाद में पुलिस के प्रयासों से जब लड़की मिली तो उसने पुलिस से कहा कि आरोपी उसे ले कर जम्मू चला गया था जहाँ उस से उसने निकाह भी कर लिया . लड़की के जन्म प्रमाण पत्र से पता चला कि लड़की निकाह के समय नाबालिग थी जिसके बाद इसी उम्र को आधार बना कर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 366 तहत आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद लड़की ने 21 अप्रैल, 2014 को शिकायत दर्ज कराई कि आरोपी ने उसका यौन उत्पीड़न किया है। उसने कहा कि आरोपी ने न केवल उसका उत्पीड़न किया बल्कि उसे अगवा कर जम्मू ले गया और वहां उसका दुष्कर्म किया। पीड़िता ने अपनी शादी से भी इनकार करते हुए कहा कि पुलिस को गुमराह करने के लिए आरोपी ने वो तस्वीरें खिंचवाई थीं।  लड़की ने अपने बयान में कहा कि वो तीन दिन तक रोती-बिलखती रही। उसने आरोपी और उसकी चाची कहा कि उसे घर छोड़ दें लेकिन उन लोगों ने उसे जान से मारने की धमकी दी। लड़की ने बताया कि आरोपी उसके लिए अपनी बहन के कपड़े भी लेकर आया था जिसे उसने पहनने से मना कर दिया था। मना करने पर आरोपी और उसकी चाची ने उसे बहुत मारा था। 

केस की सुनवाई कर रहे दिल्ली स्थित रोहिनी कोर्ट के एडिशनल सेशन जज अमित कुमार ने कहा “सुप्रीम कोर्ट के नियमों के अनुसार 18 साल से कम उम्र के लड़की के साथ संबंध बनाना कानूनन अपराध है, चूंकि लड़की एक मुस्लिम है और मुस्लिम नियमों के अनुसार लड़कियां 14 साल की उम्र में बालिग हो जाती हैं और उसने बालिग होने के बाद शादी की है। इसी इस्लामिक कानून को आधार बनाते हुए  जज ने लड़की को अविश्वसनीय बताते हुए आरोपी को बरी कर दिया। इस फैसले के बाद अचानक ही तमाम सवाल उठने लगे हैं और सब ये जानना चाह रहे है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से ऊपर शरियत का क़ानून कैसे आ गया है . 

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