सिर्फ मोदी ही नहीं बल्कि हर वो था निशाने पर जिसके मुंह से निकलता था “भारत माता की जय” व “जय श्रीराम”


भीमा कोरेगांव हिंसा की साजिश में शामिल 5 वामपंथी लोगों की गिरफ्तारी के बाद देश में राजनैतिक तूफ़ान आया हुआ है तथा एक तरह से जनता द्वारा नकारे जा चुके भाजपा विरोधी राजनैतिक दल तथा तथाकथित बुद्धिजीवी इसे देश में अघोषित आपातकाल बता रहे हैं. ये जानते हुए भी कि भीम कोरेगांव हिंसा देश को तोड़ने की बड़ी साजिश तथी तथा फिर प्रधानमन्त्री मोदी जी की ह्त्या करने की साजिश भी रची जा रही थी, फिर भी इन वामपंथी उन्मादियों की गिरफ्तारी का विरोध करना देश को शर्मशार करने वाला तो है ही, साथ ही देश के लिए बड़ा खतरा भी है. लेकिन अब भीमा कोरेगांव हिंसा को लेकर जो बड़ा खुलासा हुआ है वह काफी हैरान करने वाला है तथा ये साबित करता है कि देश विरोधी ताकतें किस कदर देश को तबाह करने पर तुली हैं. जानकारी मिली है कि माओवादियों के निशाने पर सिर्फ प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र मोदी जी नहीं थे बल्कि वो कई शीर्ष नेता ने जो राष्ट्रवादी विचारों के लिए जाने जाते हैं.

भीमा कोरेगांव हिंसा को लेकर माओवादियों से संबंध के आरोप में पांच वामपंथी कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के एक दिन बाद पुणे पुलिस ने आज कहा कि उसके पास ऐसे ‘सबूत’ हैं, जिनसे पता चलता है कि ‘आला राजनीतिक पदाधिकारियों’ को निशाना बनाने की साजिश थी. पुणे के संयुक्त पुलिस आयुक्त (जेसीपी) शिवाजीराव बोडखे ने ऐसे सबूत होने का भी दावा किया जिससे पता चलता है कि गिरफ्तार किए गए लोगों के तार कश्मीरी अलगाववादियों से जुड़े थे. पुलिस अधिकारी ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि माओवादियों ने ‘एल्गार परिषद’ के लिए पैसे दिए थे. बोडखे ने कहा कि गिरफ्तार किए गए कार्यकर्ताओं ने राजनीतिक व्यवस्था के प्रति घोर असहनशीलता दिखाई है. उन्होंने दावा किया कि इकट्ठा किए गए कुछ सबूतं से पता चलता है कि ”आला राजनीतिक पदाधिकारियों” को निशाना बनाने की साजिश थी. जेसीपी ने कहा कि पुलिस ने गिरफ्तार किए गए लोगों से लैपटॉप और पेन ड्राइव जब्त किए हैं.

पुलिस उपायुक्त शिरीष सरदेशपांडे ने कहा, ‘इकट्टा किये गये कुछ सबूतों से पता चलता है कि उनकी साजिश ‘आला राजनीतिक पदाधिकारियों’ को निशाना बनाने की थी. उन्होंने कहा कि कुछ सबूत से पता चलता है कि वे (गिरफ्तार लोग) अन्य गैरकानूनी संगठनों के साथ मिले हुए हो सकते है.  उन्होंने कहा कि अन्य जानकारियों जैसे धनराशि का प्रावधान, युवाओं और छात्रों को कट्टरपंथी बनाने में इन शहरी नक्सलियों को दी गई जिम्मेदारियों, हथियारों के प्रावधान और अन्य जानकारियां, सीपीआई माओवादी की केन्द्रीय समिति के वरिष्ठ कामरेड से प्रशिक्षण जैसी अन्य जानकारियां भी ‘सबूत’ में शामिल हैं. उन्होंने कहा कि मुम्बई, ठाणे, रांची, हैदराबाद, नयी दिल्ली और फरीदाबाद समेत कुल नौ स्थानों पर छापे की कार्रवाई की गई. हार्ड डिस्क, लैपटॉप, मेमोरी कार्ड, मोबाइल फोन और अन्य ‘आपत्तिजनक’ दस्तावेज इन स्थानों से बरामद किये गये थे.


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