म्यांमार में किससे मिले थे मोदी की हत्या की साजिश रचने वाले नक्सली ? रोहिंग्या का असली कनेक्शन यहीं तो नहीं ?

म्यांमार में बौद्धों तथा हिंदुओं के हत्यारे रोहिंग्या घुसपैठियों को लेकर तमाम सुरक्षा एजेंसिया पहले ही अलर्ट जारी कर चुकी हैं कि रोहिंग्या न सिर्फ भारत की आन्तरिक बल्कि बाहरी सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा हैं. ये बात एक बार पुनः सच साबित होती नजर आ रही है. आपको बता दें कि भीमा कोरेगांव हिंसा के मद्देनजर पुणे पुलिस द्वारा प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र मोदी जी की ह्त्या की साजिश रचने वाले अर्बन नक्सलियों की गिरफ्तारियों के दौरान जब्त किए गए दस्तावेजों से एक और सनसनीखेज खुलासा हुआ है. सूत्रों के मुताबिक ताजा दस्तावेज यह साबित करने के लिए काफी है कि यह माओवादियों का अब तक का सबसे बड़ा षड्यंत्र था. मीडिया सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार देश के खिलाफ साजिश रचते-रचते इन तथाकथित बुद्धिजीवी नक्सलियों ने आतंकवादी संगठनों से भी हाथ मिलाने से गुरेज नहीं किया.

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक ये जानकारी जब खुफिया एजेंसियों के साथ शेयर की गईं तो उनकी जांच में तमाम नई बातें सामने आईं. ये बातें चौंकाने वाली हैं कि भारत में रह रहे लोग ही कैसे भारत के खिलाफ षड्यंत्र रच रहे थे और देश के दुश्मनों से हाथ मिलाकर देश विरोधी गतिविधियां चला रहे थे. मिली जानकारी के मुताबिक़, शीर्ष माओवादी नेताओं ने हाल ही में म्यांमार में एक मीटिंग आयोजित की थी, जहां उन्होंने अन्य प्रतिबंधित संगठनों के साथ रणनीतिक गठबंधन बनाए. इस बैठक में प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी), पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) और जम्मू-कश्मीर के आतंकवादी संगठनों के नेता मौजूद थे. इस बैठक में, उन्होंने राष्ट्र के खिलाफ युद्ध चलाने और शहरी संयुक्त मोर्चा (अर्बन युनाइटेड फ्रंट) बनाने के इरादे से संयुक्त रूप से एक घोषणा पर हस्ताक्षर किए.  इस मीटिंग में पीएलए कमांडर सीपीआई (माओवादी) के युवा सदस्यों को ट्रेनिंग और हथियार प्रदान करने पर सहमत हुए. जिस तरह से नक्सलियों ने देश के खिलाफ म्यांमार में मीटिंग की, उससे कहीं न कहीं रोहिंग्या कनेक्शन होने की संभावना भी जताई जा रही है.

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, मीटिंग में ट्रेनिंग के लिए मुख्य रूप से 2 स्थानों को चयनित किया गया. जानकारी के मुताबिक छत्तीसगढ़ के जंगली क्षेत्र और गढ़चिरौली में एक अन्य स्थान को प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए चुना गया था. इन प्रशिक्षणों में गोरिल्ला युद्ध, विद्रोह और शहरी युद्ध शामिल हैं. इस बैठक में उन्होंने नदी मार्गों के माध्यम से हथियार उपलब्ध कराने की भी योजना बनाई थी. नेपाल या म्यांमार से भारत में हथियार लाने के लिए नदी के करीब 3 मार्गों की पहचान की गई थी. इस बैठक में पीएलए और सीपीआई (एम) के बीच कुछ हथियार सौदे को भी अंतिम रूप दिया गया था. इसके लिए बजट सीपीआई (एम) की केंद्रीय समिति के कामरेड वी.वी. द्वारा अनुमोदित किया गया था. सूत्रों का कहना है कि वह असम के कामरेड प्रकाश उर्फ रितुपम गोस्वामी द्वारा कामरेड आनंद को संबोधित किया गया है. ये लोग इस मामले में अभी भी वांटेड हैं. देश की सुरक्षा एजेंसियों को संदेह है कि कामरेड आनंद कटकाम सुदर्शन के अलावा कोई और नहीं है जो पूर्वी क्षेत्रीय ब्यूरो का नेतृत्व कर रहा था. जो झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल और असम में पार्टी की गतिविधियों की देखभाल करता है.  खुफिया एजेंसियां और पुणे पुलिस अब और अधिक लिंक की जांच कर रही है और हाल ही में गठित शहरी संयुक्त मोर्चा (अर्बन युनाइटेड फ्रंट) से जुड़े अधिक सदस्यों की तलाश कर रही है.

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