जिन्हें मदर या सिस्टर कहते हैं वो बताएं कि कहाँ गए लगभग 300 बच्चे.. ज़िंदा भी हैं या??

मदर टेरेसा जिनके बारे में बताया जाता है कि वह त्याग, सेवा तथा ममता की मूर्ति थी तथा इसीलिये उन्होंने भारत में जगह-जगह ईसाई मिशनरी की स्थापना की थी. मदर टेरेसा द्वारा सेवा के नाम पर स्थापित किये गए कुछ ईसाई मिशनरी संस्थानों की वास्तविकता अब सामने आ रही है जहाँ कोई सेवा नहीं बल्कि बच्चों की तस्करी की जाती है. रांची में ईस्ट जेल रोड स्थित मिशनरीज ऑफ चैरिटी से संचालित ‘निर्मल हृदय’ से बच्चों की बिक्री का मामला अब देशव्यापी मानव तस्करी का पर्दाफाश कर रहा है. झारखंड ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश, केरल, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में बच्चों को भेजने व बेचने की बात सामने आ रही है.

खबर के मुताबिक़, बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी), जिला समाज कल्याण अधिकारी (डीएसडब्ल्यूओ), पुलिस तथा अन्य अधिकारियों की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि निर्मल हृदय में रहीं पीड़िताओं से जन्मे और शिशु भवन में रखे गए 280 बच्चों का कोई अता-पता नहीं है. अब तक की जांच के दौरान जब्त किए गए कागजात के अनुसार 2015 से 2018 तक उक्त दोनों जगहों (निर्मल हृदय, शिशु भवन) में 450 गर्भवती पीड़िताओं को भर्ती कराया गया. इनसे जन्मे 170 बच्चों को सीडब्ल्यूसी के समक्ष प्रस्तुत किया गया या जानकारी दी गई. शेष 280 बच्चों का कोई अता-पता नहीं है. आशंका जताई जा रही है कि क्या इन बच्चों की भी तस्करी की जा चुकी है?

बताया गया है कि इसकी गहन जांच की जा रही है कि ये बच्चे कहां हैं लेकिन गुप्त सूत्रों से सूचना मिली है कि यह खेल लंबे समय से चल रहा है. इस काले धंधे से जुड़े लोगों की पहुंच इतनी है कि बच्चों की खरीद-बिक्री के खेल पर हाथ डालने वाले सीडब्ल्यूसी के तत्कालीन अध्यक्ष ओमप्रकाश सिंह और एक अन्य सदस्य को इन्होंने बर्खास्त करा दिया था. इन दोनों अधिकारियों पर छेड़छाड़ का आरोप मढ़कर सुनियोजित साजिश रचकर हटवा दिया गया था. ये मामला 2015 का है. अध्यक्ष और सदस्य डोरंडा स्थित शिशु भवन का निरीक्षण करने गए थे. इस दौरान उन्हें वहां घुसने से रोका गया था. जबरन जांच की बात कह घुसे तो छेड़छाड़ का आरोप लगाकर बर्खास्त करा दिया गया. इसके बाद लंबे समय तक अध्यक्ष का पद खाली रहा था. इसके बाद जहां आरा को प्रभारी अध्यक्ष बनाया गया थांं. बच्चों की तस्करी मामले में जहां आरा संदिग्ध मानी जा रही हैं. उधर सीडब्ल्यूसी को 26 बच्चों की फाइल हाथ लगी है. इस फाइल में बच्चों की मां व परिजन के नंबर मौजूद हैं. संबंधित नंबरों से अधिकारियों ने संपर्क किया तो उन्हें मां व परिजनों से जानकारी मिली कि मिशनरीज ऑफ चैरिटी की ओर से बच्चों को मरा हुआ बता दिया गया. इससे परिजनों ने बच्चों के प्रति मोह छोड़ दिया।.

खबर के मुताबिक़, सीडब्ल्यूसी की टीम ने शुक्रवार को हिनू में मिशनरीज ऑफ चैरिटी से संचालित शिशु भवन में छापेमारी की. छापेमारी कर वहां रखे गए 22 बच्चों को मुक्त कर अपनी सुरक्षा में ले लिया गया. सीडब्ल्यूसी ने बच्चों के मां-बाप का विवरण खंगालना शुरू कर दिया है. गौरतलब है कि मिशनरीज ऑफ चैरिटी की ओर से संचालित ‘निर्मल हृदय’ आश्रम से नाबालिग अविवाहित मां के दो माह के बच्चे को बेच दिया गया था. आश्रम की स्टाफ और सिस्टर की मिलीभगत से इस घटना को अंजाम दिया गया. मामले में रांची बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) ने कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई. इसे लेकर निर्मल हृदय में काम करने वाली स्टाफ अनिमा इंदवार और सिस्टर कांसिलिया को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है वहीं निर्मल हृदय की हेड सिस्टर मेरी को हिरासत में ही रखा गया है.

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