सेना का ऐसा अपमान शायद पहले कभी नहीं हुआ.. शर्मशार हुआ राष्ट्र का स्वाभिमान और घायल हुआ हमारा गौरव


ये किसी आघात से कम नही और इसको राष्ट्रीय स्वाभिमान गिरवी रखने जैसा ही माना जायेगा .. अभी फिलहाल ये जांच का विषय है कि ये किस के आदेश पर किया गया लेकिन जिसने भी किया वो निश्चित तौर पर देश के स्वाभिमान के साथ खिलवाड़ किया है और जनाक्रोश का सबसे बड़ा दोषी है .. क्या इस घटना के बाद आप या कोई और सेना को धर्मनिरपेक्ष संस्था कह पायेगा और क्या जरूरत पड़ी थी ऐसे कार्य की जिसमे हमारी फौज के स्वाभिमान को आतंक परस्त कुचल दें ..

ज्ञात हो कि रमज़ान में संघर्ष विराम के फैसले पर राष्ट्रव्यापी विरोध का सामना कर रही सत्ता का एक और आत्मघाती फैसला आया जिसने न सिर्फ राष्ट्र के रक्षक सैनिकों को गहरे संकट में धकेल दिया था बल्कि एक बार फिर से उनके सम्मान और स्वाभिमान पर की है एक गहरी ठेस .. जिन भुजाओं से डर कर वापस लौटा था चीन भी उन्ही भुजाओं को घाव दिया एक आत्मघाती फैसले ने ..

मामला है कश्मीर के शोपियाँ इलाके का .  यहां के गांव डी के पुरा में सेना की एक बटालियन को भेजा गया गांव वालों को रोज़ा इफ्तार पार्टी देने के लिए..जिन गांव वालों ने उन्ही सैनिकों पर कई बार पत्थर बरसाए थे उन्ही के बीच मे सैनिकों की एक टुकड़ी को भेज दिया गया रोज़ा इफ्तारी करवाने का आदेश दे कर .. आदेश से बंधे सैनिकों ने इसका पालन किया और पहुच गए गांव में ..

गांव पहुच कर अचानक ही सैनिकों को घेर लिया गया. उन्होंने बहुत समझाया कि वो गांव वालों को इफ्तारी पार्टी देने आए हैं लेकिन उनकी एक न सुनी गयी और उन पर पत्थरो से हमला कर दिया गया . सैनिक संख्या में कम थे, उनकी इफ्तारी के लिए लाया सामान छीन कर फेंक दिया गया और उन पर भारी हमला कर दिया गया .. हमले में बताया जा रहा कि बेहतर मौका देख कर गोलियां भी बरसाई गयी.., सैनिकों ने जैसे तैसे अपनी जान बचाई और हवाई फायर किया.. उधर से भी गोलियां चलने की आवाजें आई.. बताया जा रहा कि उधर से हुए हमले में उनकी एक 14 साल की लड़की अक़्सा जान को गोली लग गयी है . 

सैनिकों के घिरे होने की सूचना पर अतिरिक्त सुरक्षा बल मौके पर भेजा गया है और उधर से भारी पत्थरबाजी चल रही है .. इलाके में भारी तनाव है , घायल सैनिकों आदि के विस्तृत विवरण की अभी प्रतीक्षा है ..जिनके लिए सेना इफ्तारी का सामान ले गयी थी वही हिंसक हो कर सैनिकों को पीट रहे थे और भारतीय कुत्तों वापस जाओ जैसे नारे लगा रहे थे ..


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