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महिलाओं के विरोध में अब कट्टरपंथी मौलानाओं के बाद अब चर्चों के बड़े नाम भी.. चर्च की एक प्रथा ख़त्म करने की मांग पर महिलाओं को दिखाई आँखें

तीन तलाक व हलाला के नाम पर जहाँ कट्टरपंथी मौलाना महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ तनकर खड़े हुए हैं वहीं अब ईसाइयत में महिलाओं के शोषण का बड़ा आधार बन रही एक प्रथा के खत्म करने के खिलाफ चर्च के बड़े लोग सामने आ गए हैं. आपको बता दें कि राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने केंद्र सरकार से चर्च में ‘कन्फेशन’ की परम्परा को खत्म करने की अनुशंसा की है. क्योंकि इसके जरिये महिलाओं को ब्लैकमेल किया जा सकता है तथा इसके बाद उनका शोषण किया जाता है.

गौरतलब है कि चर्चों में पादरी के समक्ष गलतियों को स्वीकार करने की परम्परा को ‘कन्फेशन’ कहा जाता है. एनसीडब्ल्यू की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा कि केरल के चर्च में बलात्कार और यौन उत्पीड़न की बढ़ती घटनाओं की केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की भी जरूरत है. उन्होंने कहा, ‘पादरी महिलाओं पर गोपनीय बातें बताने का दबाव डालते हैं और ऐसा ही एक मामला हमारे सामने है, ऐसे कई मामले होंगे और हमारे सामने जो है महज एक कड़ी है.’ मलंकारा ऑर्थोडॉक्स सीरियन चर्च के चार पादरियों के खिलाफ बलात्कार के एक मामले के परिप्रेक्ष्य में यह अनुशंसा की गई है. उन पर अपने चर्च की एक विवाहित महिला का यौन उत्पीड़न करने का आरोप है. अब राष्ट्रीय महिला आयोग ने कहा है कि केंद्र सरकार इस मामले में हस्तक्षेप करे. ये महिलाओं की सुरक्षा के लिए जरूरी है.

आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा, पिछले महीने ऐसे दो मामले सामने आए हैं. इनमें एक केरल के मलंकारा का है. इसमें चार पादरी आरोपी हैं, वहीं दूसरा मामला पंजाब के जालंधर का है. रेखा शर्मा ने कहा, हमने इस मामले की जांच के लिए केंद्रीय जांच एजेंसी की मांग की है. केरल में इस तरह के मामले बढ़े हैं. हम चाहते हैं कि जांच एजेंसी इस बात का भी पता लगाए कि ऐसे और कितने मामले हैं. महिला आयोग ने इस मामले में बैठक के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ केरल और पंजाब सरकार को रिपोर्ट भेज दी है. रेखा शर्मा से जब इस बारे में पूछा गया कि यह चर्च के अधिकारों पर अतिक्रमण तो नहीं है. इस पर उन्होंने कहा, अगर बात महिलाओं सुरक्षा की होगी तो राष्ट्रीय महिला आयोग इसमें हर संभव कदम उठाएगी. इधर राष्ट्रीय महिला आयोग के इस कदम पर साइरो मलंकारा कैथोलिक चर्च के आर्च बिशप कार्डिनल बेसेलियोस क्लीमिस ने कहा, राष्ट्रीय महिला आयोग का ये प्रस्ताव अस्वीकार्य है. ये चर्च के अधिकारों और स्वतंत्रता पर सीधा हमला है. चर्चों का मानना है कि उनके धर्म के मामले में दखल देने की कोशिश की जा रही है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता.

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