#सलाम_सिपाही. लड़की के अंतिम संस्कार के भी पैसे नहीं थे लाचार पिता के पास, तभी देवदूत बन कर आये लखनऊ PGI थाना सब इंस्पेक्टर रणजीत कुमार

“पुलिस” शब्द से आपको क्या विचार मन में आते हैं ? एक कडक और सख्त छवि का अधिकारी ? असल में ये छवि खुद को चमकाने के लिए नकली राजनीति करते नेताओं ने बना रखी है जिसे बदलने के प्रयास कभी किये नहीं गये . अगर आप इस विभाग में झाँक कर देखेंगे तो ये अक्सर ऐसे कार्य करते हैं जो इनके खिलाफ भाषणबाजी करने वाले उन तमाम राजनेताओं ने कभी नहीं किया होगा .. अफ़सोस बस इस बात का है की जनता का बड़ा वर्ग अपने इन वर्दी वाले रक्षको के कार्य को न मान कर उन नकली भाषणबाज नेताओं पर ज्यादा विश्वस कर लेता है . इन्ही तमाम जांबाज़ अधिकारियो में से के पुलिस अधिकारी हैं सब इंस्पेक्टर श्री रणजीत कुमार सिंह जी जो वर्तमान में उत्तर प्रदेश पुलिस में राजधानी लखनऊ के साउथ सिटी पुलिस चौकी के इंचार्ज हैं जो रायबरेली रोड पर पड़ने वाले PGI थाने से सम्बद्ध है . इनके मानवतापूर्ण कार्य को सुन कर आप भी एक बार हमारे साथ बोल उठेंगे कि “सलाम सिपाही” ..

फिलहाल जानते हैं पूरा प्रकरण – 

एक बार फिर से दक्षिण भारत में महामारी की तरह फैले लव जिहाद की बलि चढ़ी है नीलम उत्तर प्रदेश की नीलम जबकि वर्तमान मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी अपने मुख्यमंत्रित्व काल से पहले ही समाज को इस खतरे के प्रति आगाह करते रहे हैं . लव जिहाद की बलिवेदी पर चढ़ गयी नीलम और उसके ३ बच्चों को छोड़कर भागने वाला हाफिज जहाँ एक क्रूरतम स्वरूप में सामने आया जो यकीनन मजहबी कट्टरपंथ से प्रभावित रहा होगा . जिसने तबाह कर दिया नीलम का जीवन और छोड़ दिया तीन मासूमो को दर दर भटकने के लिए ..  यह दर्दनाक समाचार पढकर आप ऐसे मज़हबी कट्टरपन्थियो का असली रुप व्प पुलिस का मानवीय चेहरा पहचाने तथा उनके जाल में ना फसें यही आशा है !

लखनऊ में पैसे के अभाव में साउथ सिटी स्थित पिपरौली में एक पिता अपनी बेटी का शव लिए घंटों रोता बिलखता रहा । अंतिम संस्कार के लिए मकान मालिक से पैसे मांगे, परंतु उसने पैसा देना तो दूर घर के अंदर शव लाने देने से भी इनकार कर दिया । असहाय पिता किसी तरह बेटी का शव लेकर श्मशान पहुंचा, परंतु वहां भी पैसों की कमी के चलते दाह संस्कार नहीं हो पा रहा था । बेबस पिता अपनी बेटी के तीन बच्चों के साथ शव के पास बैठकर रोता रहा । बाद में मानवता की मिसाल पेश कर रहे पुलिस वालों ने सामाजसेवियों की मदद से अंतिम संस्कार करवाया ।
रेलवे से रिटायर शिव प्रकाश सिंह (६५) अपनी ३५ वर्षीय बेटी नीलम व उसके ३ बच्चों के साथ पिपरौली गांव में किराए के मकान में रहते हैं । उनके अनुसार नीलम ने बहराइच जिले के रहने वाले हाफिज नाम के युवक से अपनी मर्जी से प्रेम विवाह किया था । दोनों के तीन बच्चे हुए । इसके बाद उसका पति उसे छोड़कर चला गया । तभी से उनकी बेटी अपने बच्चों को लेकर उनके साथ रहती थी । उन्होंने बताया कि, पिछले कुछ दिनों से नीलम मियादी बुखार से परेशान थी । पैसों के अभाव के चलते घर पर ही उसका इलाज चल रहा था । यहाँ ये ध्यान रखने योग्य है की जब इनकी बेटी नीलम पर हाफ़िज़ के प्यार का जूनून था तब इन्होने किसी एक की एक भी नहीं सुनी थी और उस भूल की सजा न केवल नीलम और उनके पिता ने पाई है अपितु उनके तीन बेटे अगले कई वर्षो तक इस से पीड़ित रहेगे . 
रविवार को अचानक उसकी तबीयत खराब हो गई तो उसे नजदीकी लोकबंधु अस्पताल ले जाया गया । वहां डॉक्टरों ने हालत गंभीर देखते हुए उसे बलरामपुर अस्पताल भेज दिया । मंगलवार को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई । मौके पर पहुंचे पीजीआई थाने से सम्बद्ध साउथ सिटी चौकी के इंचार्ज सब इंस्पेक्टर रणजीत कुमार सिंह ने कई समाज सेवियों के साथ इस मानवता के कार्य को अपनी जिम्मेदारी समझ कर किया जिसमे समाजसेवी एसके द्विवेदी, मनोज कुमार पाल, पूर्व पार्षद प्रताप सिंह, अजय भारती, धर्मराज रावत आदि ने भी अंतिम संस्कार में तो सहयोग किया.. इतना ही नहीं , इन सब ने मिल कर उस लाचार पिता को और मृतका के मासूम बच्चों को भी यथासम्भव कुछ पैसे दिए.. मृतका के पिता और उनके बच्चे कम से कम अपने जीवन काल में पुलिस के इस स्वरूप को नही भूल पायेंगे , ये वही स्वरूप है जो वोट बैंक के सौदागर जनता को देखने नहीं देते . 
यद्दपि इसी मामले में पुलिस के २ रूप देखने को मिले हैं जहाँ एक तरफ उसी थाने से सम्बद्ध सब- इंस्पेक्टर श्री रणजीत कुमार सिंह जी ने मानवता को सर्वोपरि रखते हुए मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के रामराज्य के प्रयासों को बल दिया वहीँ उसी थाने के थानेदार श्री अरुण कुमार राय जी से जब उनके CUG नम्बर 9454403873 पर फोन मिलाया गया तो उन्होंने अपने अधीनस्थ रणजीत कुमार सिंह जी से बात कर करवाने से मना कर दिया और साफ़ तौर पर सुदर्शन न्यूज़ के संपर्क अधिकारी को बोल दिया कि उनके पास अपने ही अधीनस्थ का नम्बर नहीं है जबकि इसके लिए उन्हें २ बार तब तब फोन किया गया उन्होंने जब- २ समय दिया . उनके व्यवहार में भी काफी असंतोषजनक रूप देखने को मिला जो अपने ही विभाग की एक सराहनीय खबर को सामने लाने के लिए शायद नहीं तैयार थे . हालात ये रहे कि इस कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी का नम्बर पाने के लिए सुदर्शन स्टाफ को वहां की क्षेत्राधिकारी महोदया जी को फोन करना पड़ा जिन्होंने बेहद सम्मानित तरीके से तथ्यों को समझा और तत्काल सब इंस्पेक्टर रणजीत कुमार सिंह जी से सम्पर्क करवाया अन्यथा निश्चित रूप से समाज और प्रदेश की जनता उत्तर प्रदेश पुलिस के इस बेहद सराहनीय कार्य को जानने व समझने से वंचित रह जाती .. उत्तर प्रदेश शासन के समस्त उच्चाधिकारियों को भी प्रेषित इस खबर से जहाँ रणजीत कुमार सिंह जैसे अधिकारियो के लिए जहाँ प्रोत्साहन की आशा है वहीँ अपने ही विभाग की भलाई न देख पाने की चाहत रखने वाले थानेदार श्री अरुण कुमार राय जी जैसे कुछ बेहद व् अति कडक मिजाज अधिकारियो को थोडा संयमित रहने के निर्देश की करबद्ध प्रार्थना भी जिनके चलते समाज में बनी पुलिस की छवि में बदलाव नहीं हो पा रहा है . 
ये घटना जहाँ लव जिहाद के फ़ैल रहे संक्रमण को दिखाती है वही उस पुलिस के मानवता वाले चेहरे को भी संसार के सामने लाती है जिसे तमाम फर्जी नेता आये दिन किसी न किसी रूप में बदनाम करते रहते हैं . सब इंस्पेक्टर रणजीत कुमार सिंह जी को इस महान कार्य के लिए सुदर्शन परिवार बारम्बार नमन करता है साथ ही जनमानस से निवेदन है की वो रणजीत कुमार सिंह जी जैसे अधिकारियो के मानवता पूर्ण कार्यों को देख कर पुलिस के प्रति अपने मन में कुछ नकली नेताओं द्वारा बनाई गयी छवि को बदलें … 

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