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निकाह, सुहागरात व हनीमून के लिए 45 दिन का पैरोल चाहता था दुर्दांत हत्यारा अबू सलेम .. अदालत ने सुनाया अपना फैसला

न जाने क्या सोच कर दाखिल हुई थी ये याचिका.. क्या मकसद रहा होगा उसका जो उसने ऐसी याचिका लगाई थी जो किसी भी हाल में न्यायसंगत नही प्रतीत होती थी .. शायद उसको लगा होगा कि उसका नाम अबू सलेम है जो कुछ नेताओं के खुद द्वारा बनाये गए तथाकथित सेकुलर सिद्धांतों के दायरे में आता है ..लेकिन राज्य सरकार के भारी विरोध के बाद उसके तमाम मनसूबे आखिरकार ध्वस्त हो गए और अदालत में हुआ न्याय ..

विदित हो कि कई घर उजाड़ने वाले , महिलाओं को विधवा करने वाले , बच्चो को अनाथ करने वाले दुर्दांत हत्यारे अबू सलेम ने अदालत में निकाह, हनीमून आदि के पूरे पैकेज की मांग हेतु 45 दिन का पेरोल मांगा था जिसे अदालत ने खारिज करते हुए मुंबई ब्लास्ट के कई पीड़ितों के चेहरे पर मुस्कान ला दी है .. अदालत ने अबू सलेम की इस मांग को स्वीकार करने योग्य नही पाया और अपना फैसला सुनाते हुए हत्यारे अबू सलेम को जेल में ही रहने का आदेश देते हुए उसके तमाम मंसूबे ध्वस्त कर दिए ..

इस फैसले से मुम्बई ही नही पूरे देश मे खुशी की लहर दौड़ गयी है .. हर जुबान पर अदालत के फैसले की प्रशंसा हो रही है ..इस मामले में भारतीय जनता पार्टी शासित राज्य सरकार ने भी अहम भूमिका निभाई जिसके सरकारी वकील ने सलेम की मांग का पुरजोर विरोध किया और अदालत को ये समझाने में सफल रहे कि ऐसे दुर्दांत हत्यारे को 45 दिन के लिए मुक्त करना किसी भी प्रकार से समाज की शांति व सुरक्षा के हित मे नहीं होगा …

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