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उत्तर प्रदेश में कन्नौज के बाद अब कानपुर में खुली शरिया अदालत.. विरोध नहीं बल्कि इसके स्वागत में दर्ज होने शुरू हुए मामले

जिस शरिया अदालत का व्यापक विरोध काफी समय से सामाजिक संगठनो ने किया उसी शरिया अदालत की शुरुआत हो चुकी है . इन शरिया अदालतों का शुरुआती केंद्र कानपुर क्षेत्र को बनाया गया है जहाँ पहले कन्नौज में खोली गयी थी शरिया अदालत जिसके बाद अब कानपुर में भी हुआ है यही काम . हैरानी की बात ये है कि तथाकथित शांत समाज द्वारा इसके विरोध में आने के बजाय इसका समर्थन किया जाने लगा है . 

ज्ञात हो कि कन्नौज में शरिया अदालत खुलने के बाद अब शरिया अदालत का दूसरा स्थान बना है कानपुर . यहाँ भी खोल दी गयी है एक और शरिया अदालत जिसके विरोध में आने के बजाय इसमें दर्ज होने लगे है मामले .. हैरानी तो तब हुई जब खुलते ही इसमें 5 मामले दर्ज करवाए गये . ये मामले दर्ज करवाने वाले लोग यहीं है जो शांतिप्रिय समुदाय से माने जाते थे और खुद को भारत के कानून और संविधान के दिखाए राह पर चलने वाला बताया करते थे . 

इस अदालत के खुलने की बाकायदा जानकारी भी दी गयी जिस पर अभी तक जिला और प्रदेश प्रशासन किंकर्तव्यविमूढ़ हालत में है और ऊपर से किसी निर्देश की प्रतीक्षा कर रहा है . कानपुर की इस अदालत का नाम “मोहकमा शरिया दारुल कजा ख़वातीन कोर्ट” है..शरिया अदालत खुलने की बहुत पहले ही बात आल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने की थी जिस पर राष्ट्रवादी लोगों द्वारा किये गये व्यापक विरोध प्रदर्शन का कोई असर नहीं पड़ा .. यद्दपि इस मामले में तथाकथित सेकुलर समाज खामोश है और बुद्धिजीवी वर्ग भी कुछ बोलने से मना कर रहा है . समाचार माध्यमो का भी एक बड़ा वर्ग अपने स्वरचित धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत निभाता दिख रहा है . 

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