नीलम को भगा कर 3 बच्चे पैदा किये हाफिज ने. फिर नीलम के कफन के पैसे नही बचे उसके धर्मनिरपेक्ष पिता के पास


लव से बड़ा जिहाद आख़िरकार साबित ही कर दिया उस धर्मांध ने . हिन्दू युवतीयो, लव जिहाद की बली हुर्इ नीलम एवं उसके ३ बच्चों को छोड़कर भागनेवाला जिहादी हाफिज की तरह एेसे अनेक धर्मांध है जो हिन्दू युवतियों को अपने प्रेमजाल में फंसाकर उनसे निकाह करते है । परंतु उनका असली उद्देश केवल हिन्दुआें की युवतीयों को फंसाना, अपनी जनसंख्या बढाना इतना ही होता है । यह उद्देश सफल होते ही एक तो वो हिन्दू युवती का जिहाद के लिए उपयोग करते है, या फिर उन्हे छोडकर जाते है । यह दर्दनाक समाचार पढकर आप धर्मांधों का असली रुप पहचाने तथा उनके जाल में ना फसें यही आशा है ! 

लखनऊ में समाज ने लव जिहाद का सबसे वीभत्स रूप तब देखा जब पैसे के अभाव में साउथ सिटी स्थित पिपरौली में एक पिता अपनी बेटी का शव लिए घंटों रोता बिलखता रहा । अंतिम संस्कार के लिए मकान मालिक से पैसे मांगे, परंतु उसने पैसा देना तो दूर घर के अंदर शव लाने देने से भी इनकार कर दिया । असहाय पिता किसी तरह बेटी का शव लेकर श्मशान पहुंचा, परंतु वहां भी पैसों की कमी के चलते दाह संस्कार नहीं हो पा रहा था । बेबस पिता अपनी बेटी के तीन बच्चों के साथ शव के पास बैठकर रोता रहा । बाद में पुलिस वालों ने सामाजसेवियों की मदद से अंतिम संस्कार करवाया ।
रेलवे से रिटायर शिव प्रकाश सिंह (६५) अपनी ३५ वर्षीय बेटी नीलम व उसके ३ बच्चों के साथ पिपरौली गांव में किराए के मकान में रहते हैं । उनके अनुसार नीलम ने बहराइच जिले के रहने वाले हाफिज नाम के युवक से अपनी मर्जी से प्रेम विवाह किया था । दोनों के तीन बच्चे हुए । इसके बाद उसका शौहर उसे छोड़कर चला गया । तभी से उनकी बेटी अपने बच्चों को लेकर उनके साथ रहती थी । उन्होंने बताया कि, पिछले कुछ दिनों से नीलम मियादी बुखार से परेशान थी । यहाँ ध्यान देने योग्य ये भी है की मृतका नीलम और उनके पिता धर्म निरपेक्ष थे और वो लव में किसी भी प्रकार की जिहाद की आशा नहीं करते थे . उनको हिन्दू संगठनो की बताई बातें तब जहर के समान लगती थी और वो हिन्दू संगठनों की बताई बातों को सिर्फ कोरी बकवास मानते थे . 
पैसों के अभाव के चलते घर पर ही उसका इलाज चल रहा था । रविवार को अचानक उसकी तबीयत खराब हो गई तो उसे नजदीकी लोकबंधु अस्पताल ले जाया गया । वहां डॉक्टरों ने हालत गंभीर देखते हुए उसे बलरामपुर अस्पताल भेज दिया । मंगलवार को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई । मौके पर पहुंचे पीजीआई थाने के दरोगा रणजीत कुमार सिंह व समाजसेवी एसके द्विवेदी, मनोज कुमार पाल, पूर्व पार्षद प्रताप सिंह, अजय भारती, धर्मराज रावत ने अंतिम संस्कार में तो सहयोग किया ही साथ ही बुजुर्ग और मासूम बच्चों को भी कुछ पैसे दिए ।

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