#Kathua मामले में #SupremeCourt का आदेश तोड़ने वाले भी मांग रहे हैं न्याय… जानिये कौन सा आदेश तोड़ा गया और क्यों??


पूरे देश में इस समय कठुआ रेप केस को लेकर बवाल मचा हुआ है. आम जनता से लेकर सेलिब्रिटी तक इस मामले पर आक्रोशित है लेकिन जिस तरह से इस मामले पर राजनीति की जा रही है उसके आधार पर कुछ सवाल भी खड़े हो रहे हैं. सुदर्शन न्यूज़ इस बात के लिए अपनी प्रतिबद्धता जाहिर करता है कि जिन लोगों ने कठुआ में मासूम के साथ दरिंदगी की है उन्हें उसकी सजा जरूर मिलनी चाहिए लेकिन दरिंदगी की शिकार कठुआ की इस मासूम को न्याय दिलाने के नाम पर जिस तरह से हंगामा खड़ा किया गया है तथा एक तरह से हिन्दू समाज को ही बलात्कारी साबित करने की कोशिश की जा रही है उससे कुछ शंकाएं तथा प्रश्न भी खड़े होते हैं, जिसमें सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि आखिर पीडिता का वास्तविक नाम व् फोटो क्यों वायरल किया गया? क्या इसके पीछे कोई साजिश है?

ये सत्य है कि रेप एक बड़ी सामाजिक बुराई बनकर सामने आया है तथा महिलाओं के साथ होते बलात्कार एक सभ्य तथा शिक्षित के लिए बेहद ही शर्मनाक है लेकिन देश में कई रेप होते हैं और आप अंदाजा नहीं लगा सकते कि कौन सा रेप हैडलाइन बनेगा और कौन सा नहीं? फिर वही सवाल उठता है कि कठुआ मामले में मासूम बच्ची की तस्वीर तथा उसका वास्तविक नाम क्यों वायरल किया गया जबकि आज तक न निर्भया की तस्वीर सामने आयी है न उसका वास्तविक नाम, तब इस मामले में ऐसी क्या मजबूरी थी जो न सिर्फ राजनेताओं ने बल्कि देश की तथाकथित मीडिया ने भी इस बच्ची की तस्वीर के साथ उसके नाम को सार्वजनिक किया जबकि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार आप रेप पीडिता की पहिचान उजागर नहीं कर सकते हैं लेकिन तब क्या कठुआ मामले को धार्मिक तथा राजनैतिक रंग देने के लिए ऐसा किया गया?

यहाँ ध्यान देने वाली बात ये है कि 8 साल की बच्ची की लाश कठुआ में 17 जनवरी 2018 को मिली थी. लेकिन ये मामला हेडलाइन्स में आया करीब 3 महीने के बाद. सवाल ये है कि ऐसा क्यों हुआ? तीन महीने पहले इस बच्ची के साथ हुई दरिंदगी को लेकर उस समय किसी का दिल क्यों नहीं पसीजा? लेकिन अब तीन महीने बाद इस पूरे मामले को सिर्फ तीन बिंदुओं पर ज़ोर देकर  प्रचारित किया जा रहा है…. पहला – ये बलात्कार मंदिर में हुआ, दूसरा – बलात्कारी हिंदू थे और तीसरा बिंदु ये था कि पीड़ित बच्ची मुसलमान थी. घटना के तीन महीने बाद जब क्राइम ब्रांच ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि पीडिता मुसलमान है तथा आरोपी हिन्दू हैं तो नेता से लेकर अभिनेता तक मोमबत्तियां लेकर उसको न्याय दिलाने को निकल पड़े तथा तथाकथित मीडिया ने भी पीडिता के फोटो तथा नाम को सार्वजनिक कर दिया क्योंकि इस मामले में हिंदुत्व को निशाना बनाया जा रहा था, हिन्दुओं को निशाना बनाया जा रहा था, इसके लिए लिए इन लोगों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भी प्रवाह नहीं की जो साबित करता है कि ये आन्दोलन खोखला है क्योंकि ये एजेंडे क हिसाब से सेलेक्टिव रूप से चलाया गया है.

क्या आपको पता है कि 6 अप्रैल को गुजरात के सूरत में 11 साल की एक बच्ची का शव मिला था. इस बच्ची के शरीर पर चोट के 86 निशान थे. और रेप के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी. अब तक इस लड़की के हत्यारे और बलात्कारी पकड़े नहीं गए हैं. और ना ही इस बच्ची की पहचान हो पाई है. अब हमारा सवाल ये है कि क्या अभी तक आपको सोशल मीडिया पर इस बच्ची की तस्वीर दिखी? क्या आपको इस बच्ची को इंसाफ दिलाने के लिए कोई Hashtag Trend करता हुआ दिखाई दिया? क्या इस बच्ची के पक्ष में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का कोई Celebrity हाथों में पोस्टर लेकर ये कहता हुआ दिखा कि मैं शर्मिंदा हूं? ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है. क्योंकि इस बच्ची के रेप और हत्या में राजनीतिक और धार्मिक एजेंडा ढूंढने की गुंजाइश नहीं है.

इसी तरह से क्या आपको बिहार के रोहतास की उस 6 साल की बच्ची के बारे में पता है, जिससे 10 अप्रैल को रेप किया गया था. इस बच्ची से बलात्कार करने वाला मोहम्मद मेहराज 40 साल का व्यक्ति है, और ये उस लड़की का पड़ोसी था. इस वक़्त इस लड़की की हालत खराब है, और वो अस्पताल में ज़िंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही है. पुलिस ने आरोपी को पकड़ लिया है. लेकिन आपने सोशल मीडिया पर या किसी मेन स्ट्रीम मीडिया में इस लड़की की तस्वीर नहीं देखी होगी. वैसे सोशल मीडिया पर इस लड़की के नाम से एक तस्वीर Viral हो रही है, लेकिन वो तस्वीर फर्ज़ी है.

से ना जाने कितने रेप पीड़ित हैं. लेकिन उन्हें सिर्फ एक आंकड़े की तरह पेश किया जाता है और लोग अपनी ज़िम्मेदारी से मुक्ति पा लेते हैं.रेप की किसी घटना पर अगर देश में कोई सबसे बड़ा आंदोलन हुआ है, तो वो है निर्भया गैंगरेप के बाद हुआ आंदोलन. दिसंबर 2012 में दिल्ली में निर्भया के साथ 6 लोगों ने गैंगरेप किया था. उस दौर में पूरे देश में एक आंदोलन खड़ा हो गया था. लोग सड़कों पर उतर आए थे. लेकिन आपको आज तक निर्भया का असली नाम पता नहीं होगा. उसकी फोटो भी शायद आपने कभी नहीं देखी होगी लेकिन कठुआ मामले में न सिर्फ पीडिता का नाम पता है बल्कि उसकी तस्वीर भी वायरल हो चुकी है.

Indian Penal Code की धारा 228-A में मीडिया के लिए एक प्रावधान है . जिसके मुताबिक मीडिया किसी भी रेप पीड़ित की पहचान उजागर नहीं कर सकता. उसका चेहरा नहीं दिखा सकता. लेकिन कठुआ रेप और मर्डर केस में मीडिया ने इस कानून को भी नहीं माना. मीडिया के बड़े बड़े पत्रकारों ने 8 साल की बच्ची की तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट की. असल में मीडिया एक ख़ास तरह के एजेंडे का शिकार हुआ है. एजेंडा ये था कि इस रेप और मर्डर केस को धार्मिक रंग देना है. इसके लिए कुछ लोगों ने पहले पीड़ित लड़की की तस्वीरें सोशल मीडिया पर Share कीं. उसका नाम और धर्म बताया गया. उसके बलात्कारियों का नाम और उनका धर्म बताया गया. और जब सोशल मीडिया पर तरह तरह के Hashtag Trend करने लगे, तो फिर Mainstream Media भी इस एजेंडे में फंस गया और उसने पीड़ित लड़की का नाम और उसकी फोटो अपनी Reports में दिखानी शुरू कर दी.

 कठुआ के मामले में एक ऐसा छिपा हुआ एजेंडा चलाया जा रहा है, जिसके तहत हिंदुओं को बलात्कारी कहा जा रहा है. इस पूरे मामले को ऐसा रंग दिया गया कि विदेशी मीडिया अपनी Reports में यहां तक कह रहा है कि कठुआ में Hindu बलात्कारी ने एक मुस्लिम लड़की का रेप कर दिया. ये एक खास तरह की सेलेक्टिव रिपोर्टिंग है. 1990 में जब कश्मीर से कश्मीर पंडितों की हत्या करके उन्हें भगाया गया था, तब किसी विदेशी मीडिया ने ये नहीं लिखा कि कश्मीरी मुसलमानों ने कश्मीरी हिंदुओं का नरसंहार किया. हिंदू धर्म की एक बड़ी विशेषता य़े है कि वो आत्म चिंतन करना सिखाता है और इसीलिए हिंदुओं को अपने धर्म की आलोचना करने में भी कोई परहेज़ नहीं होता. हिंदू धर्म में पश्चाताप को बहुत महत्व दिया गया है. और कुछ लोग शायद इन्हीं बातों का फायदा उठा लेते हैं.

ऐसे हालात में जब कठुआ जैसी कोई घटना होती है, तो हिंदू खुद को दोषी मानने लगते हैं. बहुत सारे लोग तो हिंदू धर्म को ही दोषी मानने लगते हैं. हमारे कथित रूप से पढ़े-लिखे अभिनेता, बुद्धिजीवी, Celebrity और डिज़ाइनर पत्रकार तो हाथों में पोस्टर लेकर सोशल मीडिया पर अपना आक्रोश व्यक्त करते हैं. और उन Posters में लिखा होता है कि हम हिंदू होने पर शर्मिंदा हैं. कठुआ की घटना के बाद ये एजेंडा भी ज़ोर शोर से चल रहा है. लेकिन ज़रा सोचिए कि क्या कठुआ की उस बच्ची से रेप इसलिए हुआ कि वो मुसलमान थी? क्या मुस्लिम होने के कारण उसके साथ रेप किया गया? अगर नहीं तब क्यों हिन्दुओं को बलात्कारी साबित करने की नापाक कोशिश की जा रही है. शर्म आनी चाहिए उन लोगों को जिन्होंने इस बच्ची के साथ हुई बीभत्स घटना पर भी अपनी राजनैतिक रोटियां सेंकी हैं.


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