कच्चे तेल के दामों में भारी गिरावट से देश की अर्थव्यवस्था में आएगी तेज़ी..


सरकार देश की गिरती अर्थव्यवस्था को मजबूत  करने पर काम कर रही है। ताकि विकास में तेजी लाई जा सके. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी घोषणाएं की हैं. वहीं दूसरी ओर कच्चा तेल में भी तेज गिरावट दर्ज की गई है.

क्च्चे तेल की कीमत 12 साल के सबसे निचले स्तर पर  30 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है. सूत्रों के मुताबिक पता चला है कि सऊदी अरब और ईरान का तनाव जारी रहने पर क्रूड और भी गिर सकता है  हालांकि यह भी पता चला है कि कच्चे तेल पर सऊदी अरब और ईरान के तनाव का असर खत्म हो गया है और अब ओवरसप्लाई फिर से मार्केट को डराने लगी गई है. ईरान ने भी साफ कर दिया है वह इस साल धीरे-धीरे मार्केट में सप्लाई बढ़ाएगा. मनी कंट्रोल के हवाले से स्टैंडर्ड चार्टर्ड की रिपोर्ट के अनुसार क्रूड 10 डॉलर प्रति बैरल तक गिर सकता है.

वहीं सस्ता तेल मांग को भी बढ़ाता है, जिससे किसानों की लागत खर्च कम होता है. जो सिंचाई के लिए डीजल पंप जैसे सेट का इस्तेमाल करते हैं. सब्सिडी पर खर्च में कमी आएगी तो सामाजिक कल्याण की योजनाओं और इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च के लिए फंड बचता है. जिससे आर्थिक गतिविधियों में बढ़ोतरी आती है.

इससे पहले साल 2014 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शपथ ली थी तब भारत बैरल कच्चा तेल के लिए 108 डॉलर चुका रहा था. लेकिन फिर तीसरे साल तक इसकी कीमत घटकर 48 डॉलर प्रति बैरल तक आ गई.

अब एक बार फिर पहले जैसा ही हो रहा है. कच्चे तेल में कमी आने से सरकार को बजट में प्रति लीटर 2 रुपये कर बढ़ाने का मौका मिल गया है. जिससे इस वित्त वर्ष में सरकार के खाते में अतिरिक्त 20 हजार करोड़ रुपये आएंगे. हालांकि तेल की कीमतों में 2017 के बाद से तेजी आ रही थी.


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