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श्रीराम मंदिर का शिलान्यास करने वाले दलित हिन्दू ने जो अब कहा वो संदेश है भीम आर्मी जैसे गुमराह समूहों के लिए


उन्मादी तत्वों के हाथों की कठपुतली बन समाज में जातिगत जहर घोलने वाले भीम आर्मी जैसे गुमराह संगठनों के लिए ये खबर मार्गदर्शक का काम कर सकती है. ये खबर उस दलित हिन्दू के बारे में जिसने अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर प्रभु श्रीराम के मंदिर का शिलान्यास किया था. अब जब सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या श्रीराम मंदिर मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है तथा उम्मीद लगाई जा रही है कि दीपावली के बाद कभी भी सुप्रीम कोर्ट इस मामले में फैसला सुना सकता है.. ऐसे हम बात करने वाले हैं अयोध्या में श्रीराम मंदिर का शिलान्यास करने वाले दलित हिन्दू कामेश्वर चौपाल की.

मीडिया सूत्रों के हवाले से मिली जानकी के मुताबिक़, बात 9 नवंबर, 1989 की है. अयोध्या में वीएचपी ने राम मंदिर शिलान्‍यास कार्यक्रम आयोजित किया. साधु-संतों और बड़ी राजनैतिक हस्तियों के बीच 35 साल के एक दलित युवा को नींव की पहली ईंट रखने के लिए चुना गया. उनका नाम था कामेश्वर चौपाल. अब जब अयोध्या विवाद पर 134 साल की अदालती लड़ाई अब खत्म हो गई है. सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. ऐसे में अयोध्या में श्रीराम मन्दिर के शिलान्यास की पहली ईंट रखने वाले दलित हिन्दू कामेश्वर चौपाल ने जो बयान दिया है वो भीम आर्मी जैसे गुमराह संगठनों के लिए एक बड़ा सन्देश है.

कामेश्वा चौपाल ने कहा है कि मैं पहली ईंट रखने वाला पल मैं जीवन भर नहीं भूल पाउंगा. वो क्षण हमें हमेशा गर्व का एहसास करवाता रहता है. वो कोर्ट के फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. अब 65 साल के हो चुके कामेश्वर चौपाल कहते हैं कि अब बहुत हो चुका, इस मसले पर जल्द से जल्द फैसला आना चाहिए. इस आंदोलन का हिस्सा कैसे बने? इसके जवाब में चौपाल बताते हैं कि श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के बैनर तले सीतामढ़ी से निकाली गई श्रीराम जानकी रथ यात्रा से इस आंदोलन में जुड़ा. इस समिति के अध्यक्ष थे महंत अवैद्यनाथ. 8 अप्रैल 1984 को विज्ञान भवन दिल्ली में मंदिर को लेकर जो धर्म संसद आयोजित की गई उसमें सक्रिय रूप से भागीदार रहा.

1989 में राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे. राम मंदिर को लेकर लगातार बन रहे राजनीतिक दवाब के बीच वो नहीं चाहते थे कि उनकी हिंदू विरोधी छवि बने. माना जाता है कि शाहबानों केस के बाद नाराज हिंदू वोटबैंक को लुभाने के लिए कांग्रेस पर दबाव था. इसलिए नवंबर 1989 में सरकार ने हिंदू संगठनों को विवादित स्थल के पास राम मंदिर शिलान्यास की इजाजत दे दी. बीजेपी पहले से ही विहिप आदि के साथ मंदिर के लिए आंदोलन कर रही थी. जब अयोध्या में राम मंदिर के बनाने के लिए संघर्ष चल रहा था. तब वीएचपी के आह्वान पर लाखों लोग ईंट को लेकर अयोध्या पहुंच रहे थे. इसी में कामेश्वर चौपाल भी थे. उस वक्त चौपाल संघ में संयुक्त बिहार के सह सचिव थे.

इसके बाद तय किया गया कि श्रीराम मंदिर के शिलान्यास की नींव दलित हिन्दू से रखवाई जाए. इसके बाद कामेश्वर चौपाल द्वारा प्रभु श्रीराम मंदिर का शिलान्यास किया गया. इस बारे में बिहार के सुपौल के रहने वाले चौपाल कहते हैं कि संतों द्वारा एक दलित व्यक्ति से मंदिर का शिलान्यास करवाना मेरे लिए वैसा ही था जैसे राम जी द्वारा शबरी को बेर खिलाना. यह ऐतिहासिक पल मेरे और दलितों के लिए गर्व का विषय है. इस समय वो बीजेपी की बिहार प्रदेश कार्यकारिणी में सदस्य हैं. चौपाल का कहना है कि अब उन्हें उस पल का इन्तजार है जब अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण होगा तथा प्रभु श्रीराम तंबू से निकलकर मंदिर में विराजेंगे.


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