सब इंस्पेक्टर जेपी सिंह की आत्मा को मिली शांति.. मारा गया चंबल का दुर्दांत डाकू बबुली कोल

पुलिस के जिस भी रूप को कोई भी जाने, समझे या प्रचारित करे लेकिन हम पुलिस के इसी रूप को जानते हैं जो समाज को निर्भयता देती है ठीक वैसे ही जैसे सेना सीमाओं पर देश के बाहरी दुश्मनो से हमारी रक्षा कर रही है वैसे ही पुलिस वो विभाग है जो समाज और सीमाओं के अंदर ही रह कर हमारी रक्षा कर रही है. समाज निर्भय महसूस करे, स्वयं को सुरक्षित महसूस करे, इसी संकल्प को सिद्धि में बदलने की कोशिश करते हुए यूपी पुलिस के सब इंस्पेक्टर जेपी सिंह चंबल ने चंबल के दुर्दांत डाकू बबुली कोल से मुठभेड़ के दौरान अपने प्राणों का बलिदान का बलिदान दे दिया था.

लेकिन उत्तर प्रदेश पुलिस के बलिदानी सब इंस्पेक्टर जेपी सिंह की आत्मा को शांति मिली होगी जब चंबल का दुर्दांत डाकू बबलू कोल मारा गया है. वो बबुली कोल जो सिर्फ आम जनता ही नहीं बल्कि सत्ता तथा कानून के लिए भी खौफ का पर्याय था. वो बबुली कोल जी सिर्फ यूपी पुलिस ही नहीं बल्कि बल्कि एमपी पुलिस के लिए भी सीधी चुनौती बना हुआ था. वो बाबुली कोल जिसे दहशत का दूसरा नाम कहा जाता था तथा जिसके नाम से ही लोग कांपते थे.. अब उस बाबुली कोल का खात्मा हो चुका है.

बबुली कोल के खात्मे के बाद से न सिर्फ पुलिस बल्कि यूपी और एमपी जनता ने राहत की सांस ली है, साथ ही आम जनता में भी बबुली कोल का खौफ ख़त्म हुआ है. बबुली कोल समाज तथा कानून के लिए कितना बड़ा ख़तरा था, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उस पर साढ़े 6 लाख रूपये का इनाम घोषित था. पुलिस का कहना है कि बबुली कोल को एक मुठभेड़ के दौरान मार गिराया गया है वहीं मीडिया में तमाम अन्य बातें भी चल रही हैं. लेकिन ये सच है कि बबुली कोल अब नहीं रहा, उसका खात्मा हो चुका है.

बबुली कोल के खात्मे के बाद लोग राहत की सांस जरूर ले रहे हैं, लेकिन इसी बबुली कोल से मुठभेड़ के दौरान यूपी पुलिस ने चित्रकूट पुलिस के सब इंस्पेक्टर जेपी सिंह को खोया था. वो दरोगा जेपी सिंह, जिका उद्देश्य था समाज को निर्भयता देना. वहीं वह उन सबके शत्रु थे जो समाज की शांति, एकता और अखंडता के शत्रु थे और उनमे से ही एक था डाकू बबुली कोल. इसी बबुली कोल के खात्मे के लिए सब इंस्पेक्टर जेपी सिंह अपनी टीम के साथ साथ निकले थे लेकिन जीवित लौट के नहीं आ सके. दरोगा जेपी सिंह तथा उनकी टीम की डाकू बबुली  कोल से मुठभेड़ हुई तथा इस दौरान गोली लगने से जेपी सिंह ने बलिदान दे दिया.

दरअसल बबुली कोल और यूपी पुलिस के बीच कई बार आमना-सामना हुआ, लेकिन पुलिस को सफलता हाथ नहीं लगी. यही नहीं एक एनकाउंटर में जेपी सिंह बलिदान हो गये थे. लेकिन बबुली कोल हाथ नहीं लगा. चित्रकूट इलाके में उसका काफी आतंक था. वैसे तो चित्रकूट के जंगलों और बीहड़ों में डकैतों का साम्राज्य दशकों पुराना है. हाल के दशकों की बात करें तो ददुआ से लेकर ठोकिया, बलखड़िया तक ने उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश की सीमा से सटे इस क्षेत्र में जमकर आतंक मचाया. पुलिस ने एक-एक कर इन सभी को निपटाया लेकिन ये सिलसिला थमता नहीं दिखा.

एक डकैत का अंत होते ही दूसरा जन्म ले लेता. इसी में एक नया नाम बबुली कोल का सामने आया. 50 से ज्यादा लोगों की हत्या कर चुके इस दुर्दांत डकैत को ददुआ का पुनर्जन्म तक कहा जाने लगा. बबुली कोल पर यूपी और मध्यप्रदेश से ईनाम घोषित था. दोनों प्रदेशों की पुलिस ने मिल कर कई बार उसके खिलाफ संयुक्त अभियान चलाया, लेकिन वह हाथ नहीं लगा. जंगल की अच्छी जानकारी और आसपास के गावों में शरण मिलने के कारण वह हर बार बचकर निकलता रहा.

बबुली कोल इतने लंबे समय तक पुलिस को चकमा देता रहा, इसके बारे में कहा जाता है कि वह महिलाओं तथा मोबाइल से दूरी बनाकर रखता था. बबुली कोल एक मामले में जेल में बंद था. तभी किसी प्रकार वह सुरक्षा तंत्र को चकमा देकर जेल से भाग निकला. जेल से फरार होने के बाद बबुली कोल के खिलाफ पहला मामला 2012 में दर्ज हुआ. जब टिकरियां गांव के ही एक परिवार के दो सदस्यों की उसने हत्या कर दी. इसके बाद जून 2012 में उसने डोंडा टिकरिया गांव के एक ही परिवार के 5 सदस्यों की नाक काट दी और हाथ-पैर में गोली मार दी. इसके बाद सभी को जिंदा जला दिया. बताया जाता है कि इस घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग में बबुली कोल ने कराई थी. इसी घटना के बाद यूपी सरकार ने उसके ऊपर 1 लाख का इनाम घोषित कर दिया.

लेकिन बबुली कोल का आतंक समय के साथ बढ़ता ही गया. उसने 31 दिसंबर 2012 को पुलिस का मुखबिर होने के शक में खमरिया के जंगल में दो की हत्या की फिर मानिकपुर जिले के निहि गांव में अपने ही मुखबिर राजू पाल की हत्या कर दी. आरोप लगाया कि राजू पाल ने पाला बदलकर पुलिस की मुखबिरी शुरू कर दी थी. इसके बाद अगले चार सालों में 2016 तक बबुली कोल ने करीब 50 से ज्यादा लोगों की हत्याओं को अंजाम दिया. यही नहीं इस दौरान दर्जनों अपहरण के मामले भी सामने आए, जिनमें पता चला कि मोटी रकम वसूली गई. उस पर साधे 6 लाख का इनाम घोषित किया गया लेकिन बबुली कोल हाथ नहीं आया बल्कि सब इंस्पेक्टर जेपी सिंह की जान चली गई. लेकिन कहते हैं कि हर बुराई का अंत जरूर होता है और यही हुआ है बबुली कोल के साथ, जब उसका खात्मा हो चुका है.

राष्ट्रवादी पत्रकारिता को समर्थन देने के लिए हमें सहयोग करें. नीचे लिंक पर जाऐं–

 


राष्ट्रवादी पत्रकारिता को समर्थन देने हेतु हमे आर्थिक सहयोग करे. DONATE NOW पर क्लिक करे
DONATE NOW

Share