वो राज्य जहाँ पहली बार बताया गया कि गांधी की मौत हत्या नहीं बल्कि दुर्घटना


कल का दिन था जब नाथूराम को फांसी हुई थी.. इस दिन सोशल मीडिया पर नाथूराम के समर्थन में जिस प्रकार से पोस्ट देखने को मिली उसने एक बार फिर से लोगों को उस समय की याद दिलाई जब अभी हाल में ही गांधी जयंती पर ट्विटर पर गोडसे अमर रहें ट्रेंड कर गया था, वो भी पूरे दिन.. फ़िलहाल एक बार फिर से नाथूराम गोडसे के फांसी के दिन सोशल मीडिया जहाँ सक्रिय रही तो वहीँ एक प्रदेश की सरकार के एक मामले ने इस मुद्दे को फिर से हवा जैसी दे डाली है..

एक वो प्रदेश जहाँ की किताबों में गांधी की मौत को हत्या नहीं बल्कि एक दुर्घटना करार दिया गया है.. अभी ये मामला शुरुआती चरण में ही था कि अचानक बखेड़ा खड़ा हो गया है.. ये प्रदेश है उडीसा जहाँ इस समय मुख्यमंत्री के तौर पर नवीन पटनायक हैं जिनसे गांधीवादी अब जवाब माँगना शुरू कर दिए हैं. जिस किताब में गांधी की मौत हत्या के बजाय दुर्घटना लिखी गई है वो किसी की व्यक्तिगत लिखित किताब नहीं बल्कि सरकारी पुस्तक है जो इस समय वाद विवाद का केंद्र बन गई है..

राजनीतिक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से माफी मांगने और इस बड़ी भूल को तत्काल सुधारने को कहा है. महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर प्रकाशित दो पृष्ठों की पुस्तिका ‘आमा बापूजी: एका झलक’ में उनकी शिक्षाओं, उनके कार्यों और ओडिशा से उनके जुड़ाव की संक्षिप्त जानकारी दी गई है. इस पुस्तिका को राज्य सरकार के स्कूलों और राज्य सरकार से सहायता प्राप्त स्कूलों में वितरित करने के लिए प्रकाशित किया गया था. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री नरसिंह मिश्रा ने कहा कि सरकार के प्रमुख होने के नाते मुख्यमंत्री को पुस्तिका में प्रकाशित गलत सूचना के लिए माफी मांगनी चाहिए. उन्होंने इस गलती को अक्षम्य कृत्य बताया.


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