देविका रोटवानी-जिसकी गवाही से मिली थी दुर्दांत आतंकी अजमल कसाब को फंसी, उसको जान से मरने की धमकी देने वाले कहते हैं कि उनकी राष्ट्रभक्ति पर शक न किया जाये

आज देश में राष्ट्रवादिता की बड़ी बड़ी बातें की जाती हैं. अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय के लोग कहते हैं कि वे देशद्रोही नहीं व उनकी राष्ट्रवादिता पर शक नहीं करना चाहिए. लेकिन 26/11 मुंबई हमले की मुख्य चश्मदीद गवाह व अपनी गवाही से अजमल कसाब को फंसी तक पहुंचाने वाली देविका रोटवानी को जो जान से मारने की धमकियां मिली तथा जो आज भी अनवरत जारी हैं. इसमें सबसे आश्चर्यजनक बात ये है कि देविका को ज्यादातर धमकियां पाकिस्तान या दुबई से नहीं बल्कि गजवा-ऐ-हिन्द का स्वप्न देखने वाले हिंदुस्तान में शरीयत लागू करने का मंसूबा पाले बैठे हिन्दुस्तान के ही मुस्लिमों द्वारा मिली हैं. इसके बाद भी ये लोग कहते हैं कि इनकी राष्ट्रवादिता पर शक न किया जाए.

26/11 को आतंकियों ने जब पहले सीएसटीएम टर्मिनल पर हमला किया था उस समय देविका अपने पिताजी के साथ किसी कार्य के सिलसिले में पुणे जाने के लिए टर्मिनल पर ही थी जहाँ दुर्दांत आतंकी अजमल कसाब की एक गोली देविका के पैर मैं लगी.. जब देविका को गोली लगी तो देविका ने कसाब का चेहरा देख लिया था. यही देविका रोटवानी मुंबई हमले केस में चश्मदीद गवाह बनी तब उसने कोर्ट में बेख़ौफ़ होकर 3 लोगों मैं से एक अजमल कसाब को पहिचान लिया तथा अपनी हिम्मत व राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्य का दायित्व निभाते हुए न्यायाधीश महोदय से कहा कि हाँ यही है वो दुर्दांत आतंकी जिसने मेरे देश पर हमला किया है मेरी भारतमाता पर हमला किया है, दीपिका के इस बयान के बाद ही कसाब को फांसी की सजा सुनाई गयी थी. 

मूल रूप से राजस्थान के गंगानगर की रहने वाली देविका ने बताया कि उसने अजमल के खिलाफ गवाही तो दे दी थी लेकिन उसके बाद उसको देश के विभिन्न हिस्सों से दुर्दांत आतंकी अजमल के पैरोकार शांतिप्रिय समुदाय के लोगो के द्वारा जान से मारने की धमकी भरे कॉल आने लगे थे. जिससे उसका घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया था. 
देविका ने तो भारतमाता को लहूलुहान करने वाले सेकड़ों लोगों की जान लेने वाले देश के दुश्मन को सजा दिलाने के लिए गवाही दी थी, इसके बाद जहाँ देविका का सम्मान होना चाहिए था, उसको पुरस्कृत किया जाना चाहिए था वहीं ये शांतिप्रिय समुदाय के लोग देविका रोटवानी की जान लेना चाहते हैं. इसके बाद भी देश के दुश्मन का साथ देने वाले ये लोग कहते हैं कि इनको शक की नजरों से न देखा जाये उनको देशद्रोही न कहा जाए. सुदर्शन न्यूज़ जहाँ देविका रोटवानी की हिम्मत व् उनकी बहादुरी को सलाम करता हैं वहीं देश के नागरिकों से सवाल करता है कि देश के दुश्मन को बचाने के लिए एक वीरांगना बालिका को धमकाने वाले लोगों को देशद्रोही न बोला जाये तो क्या बोला जाये?

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