हज पर सही निर्णय क्या हुआ उबल पड़ा देवबंद… हर बात की तरह एक बार मोदी को घोषित किया मुस्लिम विरोध

हज पर दी जाने वाली सब्सिडी को केंद्र सरकार ने बंद करके इस देश के हक़ में एक और बड़ा फैलसा लिया है. आज तक हज पर जाने वालों को सरकार की तरफ से करोड़ो रूपये की छूट दी जाती थी. लेकिन मोदी सरकार ने इस मुफ्त की छूट को हमेशा के लिए बंद कर दिया है. नोटबंदी. gst के बाद ये भी देश हित में लिया गया बड़ा निर्णय है. कई सालों से देश के आर्थिक हालात सामान्य नहीं होने के बावजूद भी हज पर जाने वाले यात्रियों को सब्सिडी दी जाती थी.

लेकिन अब केन्द्र सरकार ने इसे बिल्कुल बंद कर दिया है.

दरअसल सरकार के इस निर्णय के बाद कुछ मुस्लिम संगठन तिलमिला गये है. जब देश में तीन तलाक के खिलाफ कानून बनता है तो देवबंदी उलमा के लोग कहते है कि देश के कानून से बड़ा शरियत का कानून है. क्या शरियत में कही लिखा है हज जाने के लिए सरकार पैसा देगी? जब तीन तलाक पर मुस्लिम बहनों के हित में मोदी सरकार कानून बनाती है तो इन्हें आपत्ति होती है.

तब ये लोग शरियत का हवाला देकर इसे गैर कानूनी बताते है. जब वही सरकार हज जाने के लिए पैसा देती थी तो ये लोग सबसे पहले झोली फैलाते थे. क्या देवबंदी उलेमाओं ने तब सोचा की ये मोदी सरकार है और हज पर छूट दे के गलत कर रही है ? ऐसे लोगों को क्या कहा जाये मौका परस्त या कुछ और ? 

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