खुद को अरब से अलग किया देवबन्द ने और बोला.. वो बदल रहा तो ये जरुरी नहीं कि हम भी बदलें.. जानिए किस मामले में ?


देवबंदी उलमा को हर अच्छी बात पर मिर्ची लगती है ये तो हर रोज की बात है। इस बार निशाना बना है सऊदी अरब का योग। आपको बता दे की भारत में जहां योग और धर्म लेकर विवाद छिड़ा है, वहीं दूसरी ओर इस्लामिक देश सऊदी अरब में योग को एक खेल के तौर पर आधिकारिक मान्यता दे दी है। सऊदी अरब में अब लाइसेंस लेकर योग सिखाया जा सकेगा। खास बात यह है कि नोफ मारवाई नामक एक महिला को सऊदी अरब की पहली योग प्रशिक्षक का दर्जा भी मिल गया है।

योग को खेल के तौर पर सऊदी में मान्यता दिलाने का श्रेय भी नोफ को ही जाता है। नोफ ने इसके लिए लंबे समय तक अभियान चलाया था।

अब सऊदी अरब में योग को खेल के रुप में अनिवार्य किए जाने के मामले में देवबंदी उलमा का कहना है कि सऊदी हुकूमत ने स्कूलों में वर्जिश को अनिवार्य किया है। योगा शिर्क (गलत) है इसलिए वहां की हुकूमत उसे कभी लागू नहीं कर सकती। मंगलवार को फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मौलाना मुफ्ती अरशद फारूकी का कहना है कि जैसा की खबरों में बताया जा रहा है कि सऊदी अरब के स्कूलों में किसी चीज को अनिवार्य किया गया है वो योगा नहीं बल्कि वर्जिश है।

शरीयत के लिहाज से योग शिर्क है और सऊदी अरब अपने यहां शिर्क को कभी लागू नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि वर्जिश सही है, लेकिन योगा इस्लामी नुकते नजर से गलत है। दुनिया के नक्शे में वो जो तब्दीलियां कर रहे हैं जरूरी नहीं की हम भी उन्हें माने। हम सिर्फ शरीयत को मानते और उसी पर चलते हैं। इसलिए शरीयत में योगा की कोई गुंजाइश नहीं है। 


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