जुगसलाई जमशेदपुर बना दूसरा कासगंज.. माँ सरस्वती प्रतिमा विसर्जन जुलूस पर बम से हमला

कासँगज , फिर मध्यप्रदेश के शुजालपुर इसके बाद झारखंड का जुगसलाई.. हर तरफ अचानक ही अराजकता व मज़हबी कट्टरपंथ का वो रूप देखने को मिल रहा है जो तथाकथित सेकुलर समाज के लिए भले ही खामोशी का मुद्दा हो लेकिन कहीं न कहीं ये आने वाले समय के लिए एक बड़े खतरे की घण्टी है जिस पर तत्काल ही रोक न लगी तो इसके दूरगामी परिणाम नकारात्मक ही होंगे …

विदित हो कि यूपी के कासगंज में हिंसा हुई तो उधर झारखंड का जमशेदपुर बाल बाल सुलगने से रह गया जब पूरी आस्था व श्रद्धा के साथ माता सरस्वती की प्रतिमा विसर्जन करने जा रहे हिंदुओं पर मज़हबी कट्टरपंथियों ने मात्र उनके देवीगीत को ही बहाना बना कर हमला बोल दिया ..यद्द्पि पुलिस की मुस्तैदी केई वजह से कासगंज की तर्ज पर जमशेदपुर जलने से बच गया और कोई चन्दन वहां बलिदान नही हुआ जबकि कट्टरपंथियों की पूरी तैयारी थी ..

श्रद्धालुओं के खून खराबे के मंसूबे पुलिस के चलते नाकाम होने के बाद मज़हबी कट्टरपंथियो ने इसके बाद पुलिस से ही भिड़ंत कर ली और पुलिस की गाड़ी को तोड़ दी गई है, इतना ही नही वहां व्यापक कश्मीरी अंदाज़ में पत्थरबाजी भी हुई जिसके बाद पूरा इलाका पुलिस की सायरन से गूंज उठा है.यह जुलूस माँ भवानी क्लब की ओर से निकाला गया था जो पूरे श्रद्धामय ढंग से माता के गीत गाते मूर्ति विसर्जन के लिए जा रहे थे जब उन्हें गाना बन्द करने और अपना इलाका की धौंस मज़हबी कट्टरपंथियों ने दी ..
हालात काबू करने के लिए पुलिस ने बवाल कर रहे लोगों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा. पत्थरबाजी कर रहे लोगों को भी पुलिस ने वहां से भगा दिया और पूरे इलाके को अपने कब्जे में ले लिया. पुलिस ने हंगामे के बाद जुगसलाई इलाके की सभी दुकानें बंद करा दी और लोगों को घरों में रहने के लिए कहा.जमशेदपुर के एसपी अनूप टी मैथ्यू ने एक बयान में कहा, “सांप्रदायिक तनाव ना फैले इसके लिए जमशेदपुर के इस इलाके में दंगा निरोधी दस्ते और आरएएफ के जवानों ने मार्च किया. 

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