यदि जंग हुई तो ये देश खुल कर खड़े होंगे भारत के साथ.. घोषणा लगभग हो चुकी

भारत और चीन के बीच करीब पिछले दो महीनों से डोकलाम को लेकर विवाद चल रहा हैं। भारत, भूटान, चीन की सीमा पर मौजूद डोकलाम पर दोनों देशों की

सेना तैनात है। चीन लगातार भारत पर सेना हटाने का दबाव बना रहा है और लगातार भारत से युद्ध करने का दबाव बना रहा है। इस मसले पर चीन अंतरराष्ट्रीय

बिरादरी में घिरता दिख रहा है। अमेरिका के बाद जापान ने भी डोकलाम विवाद पर भारत का समर्थन किया है। जापान ने कहा है कि दोनों देशों के बीच विवाद का

हल बातचीत के जरिए होना चाहिए।

दो महाशक्तियों के समर्थन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के पक्ष में बन रहे माहौल के बीच चीन भड़क उठा है।

अगर अपने देश भारत की बात की जाये तो भारत 1962 की तुलना में बेहद मजबूत हुआ हैं और हमारे देश ने काफी तरक्की की है तो चीन की रफ्तार तो हमसे

कहीं ज्यादा है। आज का चीन भी 1962 वाला चीन नहीं है बल्कि तब की तुलना में वह काफी आगे निकल चुका है। यह सर्वविदित है कि 1962 की लड़ाई में

भारत को चीन के हाथों करारी हार मिली थी। उस जंग में भारत के करीब 1300 सैनिक मारे गए थे और एक हजार सैनिक घायल हुए थे। डेढ़ हजार सैनिक

लापता हो गए थे और करीब चार हजार सैनिक बंदी बना लिए गए थे। वहीं, चीन के करीब 700 सैनिक मारे गए थे और डेढ़ हजार से ज्यादा घायल हुए थे। इसी

को ध्यान में रखकर चीन ने इतिहास से सबक लेने की चेतावनी भारत को दी है।

1962 के भारत-चीन युद्ध के बारे में जो जानकारी सामने आई है उससे लगता है उस वक्त के राजनीतिक नेतृत्व और सेना के कई कमांडरों ने अपनी जवाबदेही

ठीक से नहीं निभाई जिसकी वजह से भारत को हार का मुंह देखना पड़ाण् बताया जाता है कि न तो सेना लड़ने के लिए तैयार थीए न ही उसके पास कपड़े थे और

न ही हथियार। रही सही कसर मौसम ने पूरी कर दी थीण् वायुसेना के कई रणनीतिकारों को यह बात आज तक हजम नहीं हुई कि आखिर उस वक्त जंग में

वायुसेना का इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया क्योंकि चीनी वायुसेना की तुलना में उस समय भारतीय वायुसेना काफी बेहतर थी।

अमेरिका

अमेरिका मौजूदा समय में भारत का सबसे ताकतवर दोस्त है। अमेरिका लगातार डोकलाम मामले पर नजर बनाए हुए हैं ओर से बयान भी आ चुका है कि भारत हमारा अच्छा दोस्त हैए चीन और भारत को इस मुद्दे को बातचीत से सुलझाना चाहिएण् इससे पहले पूर्व अमेरिकी राजदूत रिचर्ड वर्मा और अमेरिका के इलिनोइ से सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने डोकलाम विवाद के लिए चीन को जिम्मेदार बता चुके हैं। आपको बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप का रुख चीन को लेकर कड़ा रहा हैए क्योंकि अमेरिका की नाक में दम करने वाले नॉर्थ कोरिया के लिए चीन हमेशा ही नरम रुख अपनाता रहा है।

जापान .

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापानी पीएम शिंजो अबे की दोस्ती का असर यहां पर भी दिखा है। जापान ने खुले तौर पर भारत का साथ दिया है। जापान के राजदूत केंजी हीरामत्सू ने आजतक से बातचीत में कहाए श्डोकलाम को लेकर पिछले करीब दो महीनों से तनातनी जारी है, हमारा मानना है कि इससे पूरे क्षेत्र की स्थिरता प्रभावित हो सकता हैए ऐसे में हम इस पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहाए चीन और भूटान के बीच इस क्षेत्र को लेकर विवाद है, जहां तक  भारत की भूमिका की बात हैए तो हम मानते हैं कि वह भूटान के साथ अपने द्विपक्षीय समझौते के आधार पर ही इस मामले में दखल दे रहा है।

ऑस्ट्रेलिया

ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री जूली बिशप हाल ही में भारत दौरे पर आईं थी। उन्होंने यहां पर साफ तौर पर कहा था कि चीन को डोकलाम विवाद पर संयम बरतना चाहिए और भारत से बात करनी चाहिए। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया दक्षिणी चीन सागर को लेकर चीन की दादागिरी को लेकर भी चेतावनी जारी कर चुका है। इस  मुद्दे पर ऑस्ट्रेलिया ने चीन की सैन्य महत्वकांशाओं का विरोध किया था।

वियतनाम

पीएम मोदी ने 2016 में वियतनाम की यात्रा की थीए तभी से लेकर ही दोनों देशों के बीच में संबंधों में मजबूती आई है। दक्षिणी चीन सागर में विवाद को लेकर वियतनाम की चीन से हमेशा ही ठनी रही है। इसके अलावा भारत ने उसकी लगातार मदद की है। भारत वियतनाम को आकाश मिसाइल देने पर भी विचार कर  रहा हैए वहीं सुखोई 30 एमकेआई लड़ाकू विमानों भी प्रशिक्षण देगा। 

यूरोपीय देश भी आ सकते हैं साथ 

यूरोप के कुछ ताकतवर देश जैसे फ्रांसए जर्मनी और ब्रिटेन भी चीन के मुद्दे पर भारत के साथ आ सकते हैं। भारत के इन सभी देशों से रिश्ते काफी अच्छे रहे हैं। वहीं, कई मुद्दों पर इन देशों ने भारत का साथ दिया है। सयुंक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इन सभी देशों ने भारत का स्थाई सीट के लिए साथ दिया हैए वहीं चीन  भारत के खिलाफ रहा है। 

पाकिस्तान  

पिछले कुछ समय से चीन और पाकिस्तान के बीच दोस्ती पनप रही है। वन बेल्ट वन रोड के जरिए चीन पाकिस्तान में काफी बड़ी मात्रा में निवेश कर रहा है। चीन ने कई आतंकवादियों को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित होने से बचाने के लिए अपने वीटो का सहारा लिया है। इस सबसे साफ है कि पाकिस्तान हर मोर्चे पर चीन  के साथ ही जाएगा। भारत और पाकिस्तान के रिश्ते वैसे भी अच्छे नहीं रहे हैंए हाल ही में चीन ने कश्मीर के मसले में भी दखल देने की धमकी दी थी। 

नॉर्थ कोरिया  

पिछले काफी समय से पूरी दुनिया की नाक में दम करने वाला नॉर्थ कोरिया चीन का करीबी हैण् एक ओर अमेरिका जब लगातार नॉर्थ कोरिया को चेतावनी दे रहा है। तब चीन ने इस मुद्दे पर अमेरिका को शांति बरतने को कहा था। चीन ने लगातार नॉर्थ कोरिया को लेकर नरम रुख अपनाया है। 

इजराइल 

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में सरकार बनने के बाद से ही भारत-इजराइल के संबंधों का तेजी से बहुआयामी विकास हो रहा है। दोनों ही देशों की सरकारें घोर राष्ट्रवादी हैं, और विचारों का समान होना दोनों राष्ट्रों के संबंधों को मजबूती प्रदान करता है।

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