श्रीराम मंदिर निर्माण की हुंकार रैली में कभी मायावती के बेहद करीबी रहे मुकुल की मौजूदगी ने उड़ाए जातिवादी सोच वालों के होश

श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई विहिप की धर्मसभा में मुकुल उपाध्याय के शामिल होने से नए राजनैतिक कयास लगना शुरू हो गये हैं. बता दें कि मुकुल उपाध्याय बसपा से पूर्व एमएलसी रहे हैं, जिन्हें हाल ही में बसपा से निष्कासित कर दिया गया था. मुकुल उपाध्याय का कहना है कि उन्हें विश्व हिंदू परिषद के कुछ बड़े नेताओं ने बुलाया था. इसलिए इस धर्मसभा में उन्होंने शिरकत की.  वैसे भी अयोध्या में राम मंदिर बनना चाहिए क्योंकि अयोध्या श्रीराम की जन्मभूमि है.

बता दें कि मुकुल उपाध्याय बसपा के कद्दावर नेता माने जाते थे तथा वह पूर्व ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय के भाई हैं. बसपा से निष्कासन के बाद मुकुल उपाध्याय कहना था कि वह अलीगढ़ लोकसभा क्षेत्र से बसपा की टिकट मांग रहे थे तो मायावती ने उनसे पांच करोड़ रुपये मांगे थे. जब वह रुपये की व्यवस्था नहीं कर सके तो उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया. मुकुल उपाध्याय पूर्व में आरएसएस के सक्रिय कार्यकर्ता भी रहे हैं. हालांकि बसपा से निकाले जाने के बाद अभी तक उन्होंने किसी राजनीतिक दल में शामिल होने की घोषणा नहीं की, लेकिन राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के लिए रविवार को दिल्ली में हुई धर्मसभा में शामिल होकर उन्होंने सभी को चौंका दिया.

मुकुल इस धर्मसभा में मंच पर आसीन थे. इस बारे में जब उनसे पूछा गया तो उनका कहना था कि यह कार्यक्रम गैर राजनीतिक था. उन्हें विश्व हिंदू परिषद के नेताओं ने बुलाया था इसलिए वह इस धर्मसभा में गए थे. उन्होंने कहा कि अयोध्या में रामजन्म भूमि पर मंदिर बनना चाहिए और अब जन-जन की यही पुकार है, इसलिए ही धर्मसभा में शामिल होने गए थे। अपने अगले राजनीतिक कदम के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि 12 दिसंबर या उसके बाद ही यह इस बारे में कुछ कहेंगे.

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